पूर्व पीएम वाजपेयी को मानते थे बड़ा भाई और पिता

राजनीति में सभासद से संसद और राजभवन तक सफर तय करने वाले लालजी टंडन का 21 जुलाई की सुबह निधन हो गया। लालजी टंडन को बिमारी की वजह से 11 जून को लखनऊ के मेदांता अंसपताल में भर्ती कराया गया था जहां उनका इलाज चल रहा था। कुछ दिन पहले ही डॉक्टरों ने हेल्थ बुलेटिन जारी कर उनकी हालत स्थिर बताई थी हालांकि अचानक उनकी तबीयत फिर खराब हुई और वो देश को अलविदा कह गए। मेदांता में 21 जुलाई की सुबह 5:29 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। लालजी के निधन पर यूपी में 3 दिन का और MP में 5 दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया। वहीं लालजी टंडन के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी,सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर कई दिग्गज नेताओं ने शोक प्रकट किया।

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लालजी टंडन ना सिर्फ एक दिग्गज नेता थे बल्कि  यूपी के लखनऊ के रहने वाले लालजी मायावती के राखी भाई के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भी काफी करीब थे। लालजी टंडन खुद कहा करते थे कि अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति में उनके साथी, भाई और पिता तीनों की भूमिका अदा की है। अटल के साथ उनका करीब 5 दशकों का साथ रहा। इतना लंबा साथ अटल का शायद ही किसी और राजनेता के साथ रहा हो। यही वजह रही कि अटल बिहारी वाजपेयी के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को लखनऊ में टंडन ने ही संभाला था और सांसद चुने गए थे।

कैसा रहा लालजी टंडन का सफर?

बता दें कि लखनऊ की जान लालजी टंडन का जन्म 12 अप्रैल 1935 में हुआ था। अपने शुरुआती जीवन में ही लालजी टंडन RSS से जुड़ गए थे। उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई करने के बाद 1958 में लालजी की कृष्णा टंडन के साथ शादी हुई। संघ से जुड़ने के दौरान ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से उनकी मुलाकात हुई। लालजी शुरू से ही अटल बिहारी वाजपेयी के काफी करीब रहे।

जेपी आंदोलन के दौरान 2 बार जाना पड़ा जेल

लालजी टंडन का राजनीतिक सफर साल 1960 में शुरू हुआ। उन्होंने इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ जेपी आंदोलन में भी बढ़-चढकर हिस्सा लिया था।इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। टंडन दो बार पार्षद और 2 बार विधान परिषद के सदस्य रहे। 1978 से 1984 तक और 1990 से 1996 तक लालजी टंडन 2 बार उत्तर प्रदेश विधानपरिषद के सदस्य रहे। इसी दौरान 1991-92 की उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार में मंत्री बने।

यूपी की राजनीति में रहा अहम योगदान

लालजी टंडन को उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई अहम योगदान के लिए भी जाना जाता है। 90 के दशक में प्रदेश में बीजेपी और बसपा की गठबंधन सरकार बनाने में भी उनका अहम योगदान माना जाता है। इसके बाद लालजी 1996 से 2009 तक लगातार 3 बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। बसपा सुप्रीमो मायावती उन्हें अपने बड़े भाई की तरह मानती थीं और राखी भी बांधा करती थीं। 1997 में वह प्रदेश के नगर विकास मंत्री रहे।

संभाली अटल की विरासत

2009 में लखनऊ से बने सांसद

2018 में बिहार के बने राज्यपाल

जुलाई 2019 में MP के बने राज्यपाल

2009 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीति से दूर होने के बाद जब लखनऊ लोकसभा सीट खाली हुई। तो बीजेपी ने लालजी टंडन को ही ये सीट सौंपी…और लालजी ने भी बीजेपी के भरोसे पर खरा उतरकर लोकसभा चुनाव में लखनऊ लोकसभा सीट से आसानी से जीत हासिल कर ली… और संसद पहुंचे।

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लालजी टंडन को साल 2018 में बिहार के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और फिर कुछ दिनों के बाद मध्यप्रेदश का राज्यपाल बनाया गया था। हालांकि जब उनकी तबीयत खराब हुई तो यूपी की गवर्नर आनंदीबेन पटेल को मध्यप्रदेश का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। शायद ये सोचकर की लालजी जल्द ठीक होकर अपने जिम्मेदारी वापस संभाल लेंगे लेकिन ऐसा ना हो सका और वो हमेशा-हमेशा के लिए आज सुबह ही अलविदा कह गए।

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