वन संपदा के बिना मानव जीवन संभव नही है। मानव पूर्ण रूप से आक्सीजन, भोजन, कपड़ा, कागज व फर्नीचर सहित कई मूलभूत जरूरतों के लिए वनों पर ही निर्भर है। गर्मी का पारा चढ़ने के साथ साथ वनक्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो जाती हैं। जंगल से पेड़ों के कटान और आग से बहुत अधिक वन संपदा का नुकसान होता है और इसका सीधा प्रभाव पर्यावरण व वन्यजीवों के साथ-साथ मानव जाति पर पड़ता है। अंधाधुंध पेड़ो का कटना, असंतुलित वृक्षारोपण , वाहनों व कारखानों का उगलता धुआं, वनक्षेत्र व पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। अकेले वायु प्रदूषण से जनित बीमारीयों से लगभग 12 लाख लोग प्रति वर्ष मौत के आगोश में चले जाते हैं। भारत में वनों की वृद्धि दर निराशाजनक पर्यावरणविद डॉ केपी सिंह बताते हैं कि पर्यावरण के अंतर्गत पेड़ों का महत्वपूर्ण योगदान वायु प्रदूषण के नियंत्रण में होता है। भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2019 के अनुसार भारतीय वनों व वृक्षावरण क्षेत्र में कुल 5186 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है। लेकिन यह वृद्धि केवल 0.65 प्रतिशत है। वहीं दूसरी तरफ कार्बन स्टाक में 21.3 मिलियन टन की बृद्धि भी हुई है।

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