ताजनगरी आगरा में इन दिनों नीम हकीम खतरे जान वाली कहावत चरितार्थ हो रही है. पैथोलॉजी लैब खोलकर गलत रिपोर्ट दी जा रही है और पैसे की उगाही की जा रही है. शहर के ईदगाह इलाके के रहने वाले शुभम ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर ऐसे ही एक पैथोलॉजी टेस्ट सेंटर पर कार्रवाई की मांग की है.

जिलाधिकारी को लिखे पत्र में शुभम ने बताया है कि उनकी भाभी राधिका वर्मा कोरोना पॉजिटिव पाई गईं थी. उनका इलाज नेमिनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर नवलपुर, आगरा में चल रहा था. इलाज के दौरान साइंटिफिक पैथोलॉजी से मरीज की जांच कराई गई. रिपोर्ट में बताया कि ब्लड में D DIMER 4044.0 की मात्रा है. इस रिपोर्ट को देखकर परिजन बेहद तनाव में आ गए. परिवार वाले इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थें. इसके बाद उन्होंने आगरा डायग्नोस्टिक सेंटर से पुनः जांच कराई. इसमें D DIMER 487.64 रिपोर्ट आई.

दोनों रिपोर्ट्स में 11 गुना का बड़ा अंतर था. जाहिर तौर पर साइंटिफिक पैथोलॉजी की रिपोर्ट गलत थी. अगर परिजनों ने सूझबूझ दिखाते हुए दूसरी जगह जांच न कराई होती और पहले वाले के आधार पर ही इलाज कराया होता तो मरीज की जान भी जा सकती थी.

आगरा का हाल यह है कि बिना तय मानकों का पालन करते हुए साइंटिफिक पैथोलॉजी जैसे लैब कुकुरमुत्ते की तरह खुल आए हैं. इनकी रिपोर्ट्स अक्सर गलत होती है. डॉक्टरों को कमीशन देकर इनका धंधा चलता है. रिपोर्ट के नाम पर जिस तरह से मरीजों और उनके परिजनों का शोषण होता है, इसे कोई देखने, सुनने वाला नहीं है.

शुभम ने जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कहा है कि आज मेरी भाभी यानी मरीज बिल्कुल स्वस्थ हैं, जबकि साइंटिफिक पैथोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार हमारे मरीज को बेहद गंभीर स्थिति में होना चाहिए था. उन्होंने जिलाधिकारी से साइंटिफिक पैथोलॉजी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

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