370 के हटने के बाद कश्मुर में कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए जिसके खिलाफ कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद और अन्य लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी।

कश्मिर में 370 के अधिक प्रावधान को खत्म कर दिए गए हैं। 370 के हटने के बाद कश्मुर में कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए जिसके खिलाफ कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद और अन्य लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर फैसला सुनाएगा।

पिछले साल 27 नवंबर को जस्टिस एन वी रमण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस बी आर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने इन प्रतिबंधों खिलाफ दर्ज याचिकाओं पर सुनवाई पूरी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी कश्मिर में लगे प्रतिबंधों के लिए सरकार का पक्ष मागां था।

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जिसपर कश्मिर घाटी में आतंकी हिंसा का हवाला देते हुए कहा था कि सीमा पार से आतंकियों को यहां भेजा जाता था जिसने स्थानीय उग्रवादी और अलगाववादी संगठनो को क्षेत्र में बंधक बना रखा था। अगर सरकार ऐसे कदम नहीं उठाती तो ये सरकार की मुर्खता होती। सरकार का ये भी कहना था कि 370 के हटने के बाद ये ऐसी गतिविधियों के और बढ़ने के आसार थे लिहाजा लोगों करी सुरक्षा को देखते हुए सरकार को ऐसे कदम उठाने पड़े।

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जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार से ये भी पूछा था कि आर्टिकल-370 को हटे हुए काफी समय बीत चुका है. सुनवाई के दौरान पीठ ने सरकार से पूछा कि सरकार और कितने दिनों के लिए प्रतिबंध रखना चाहते हैं. पीठ ने सरकार को कहा था कि सरकार को अपना पक्ष साफ करना होगा कि वो और कितने दिन में ये प्रतिबंध पूरी तरह से हटा लेंगे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट का ये भी कहना था कि पूरी तरह से इंटरनेट पर बैन नहीं लगा सकती।