सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, हो सकता है कि ये कभी वन क्षेत्र रहा हो और लैंड यूज दो साल पहले बदल दिया गया हो।

मुंबई के आरे में पेड़ों को बचाने की याचिका के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कहा है की कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, हो सकता है कि ये कभी वन क्षेत्र रहा हो और लैंड यूज दो साल पहले बदल दिया गया हो। लेकिन पहले हम ये जानना चाहते है की अभी इसकी क्या स्थिति है? महाराष्ट्र सरकार इसकी रिपोर्ट दें और बताएं कि उनके द्वारा अब तक कितने पेड़ काटे गए हैं? कितने पेड़ लगाए गए हैं?

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सरकार के वकील तुषार मेहता ने इस मामले पर दलील देते हुए कहा की, पर्यावरण हम सभी के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है। निरंतर पौधे लगाए जा रहे हैं, जिस पर जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा की पौधे लगाना एक अलग बात है। उनकी देखभाल करना एक अलग चीज है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है की, सभी प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए और अब इस मामले की सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।

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इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच द्वारा की जा रही है। बता दें कि छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आरे के पेड़ों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। छात्रों ने CJI को इस मामले में एक चिट्ठी लिखी जिसमें कहा गया था कि उन्हें अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मामले की सुनवाई करनी चाहिए और  पेड़ों की कटाई पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।

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छात्रों की अपील में कहा गया कि 4 अक्टूबर से ग़ैर क़ानूनी तरीके से पेड़ों की निरंतर कटाई जारी है और शांतिपूर्ण विरोध करने वालों लोगो को हिरासत में लिया जा रहा है। इसी मामले में गिरफ़्तार 29 लोगों को सशर्त ज़मानत मिल गई थी। जिन्हें देर रात रिहा कर दिया गया। ज़मानत की शर्त यह रखी गयी थी की वे अब प्रदर्शन में भाग नहीं ले सकते है। दूसरी तरफ़ आरे में पुलिस की नाकेबंदी अभी भी जारी है। लेकिन धारा 144 को हटा लिया गया है।