सुप्रीम कोर्ट में कश्मीर में हिरासत में लिए जा रहे बच्चों के मामले में सुनवाई चल रही है।

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर मोदी सरकार का विरोध सिर्फ विपक्षी पार्टी के नेता ही नहीं बल्कि बड़े पत्रकार, वकील और जज भी कर रहे हैं। सरकार कश्मीर में सुख शांति होने के चाहे कितने भी दावे कर रही हो लेकिन विपक्षी पार्टी के नेता और कुछ लोग इस बात को मानने को पूरी तरह तैयार दिखाई नहीं दे रहे हैं। कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी और कुछ विपक्षी पार्टी के नेता कश्मीर का हाल जानने के लिए श्रीनगर एयरपोर्ट पर पहुंच गए थे लेकिन कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के आदेश के बाद उन्हें वापस ऐसे ही लौटना पड़ा।

कश्मीर में 10 से 18 साल के बच्चों को हिरासत में लिया जा रहा है।

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कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कुछ अलगाववादी नेताओं को नजरबंद भी किया गया। इसमें महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्लाह प्रमुख थे। महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को तो राहत मिली लेकिन फारूक अब्दुल्ला को अभी तक भी नजरबंद रखा हुआ है। अब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने जम्मू कश्मीर की मौजूदा हालत पर बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि जरूरत पड़ी तो मैं जम्मू कश्मीर खुद जाऊंगा।

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जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में कश्मीर में हिरासत में लिए जा रहे बच्चों के मामले में सुनवाई चल रही है। अदालत में याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि कश्मीर में 10 से 18 साल के बच्चों को हिरासत में लिया जा रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि क्या सचमुच ऐसा है? मैं वहां के चीफ जस्टिस से रिपोर्ट मांग रहा हूं। मैं उनसे बात करूंगा। जरूरत पड़ी तो खुद वहां जाऊंगा। चीफ जस्टिस ने आगे कहा कि याद रखिए अगर आपका दावा गलत हुआ तो आपको इसका अंजाम झेलना पड़ेगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने आगे यह भी कहा कि अगर लोग हाईकोर्ट का रुख नहीं कर पा रहे हैं तो यह काफी गंभीर मामला है।