हज़ारों पद खाली होते हुए भी लोग तरस रहे हैं नौकरी को

बेरोज़गारी का आलम ये है कि डिग्री होल्डर होते हुए भी लोग नीचे पदों पर भी काम करने को तैयार हैं। बावजूद इसके सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा है। राजस्थान में नई भर्तियां न होने व नियमित रूप से रिटायर हो रहे अध्यापकों के कारण एक महीने में ही खाली पदों की संख्या में डेढ़ हजार से अधिक की बढ़ोतरी हो गई।

विभाग में अगर नयी भर्तियां होती है तो बेरोजगार युवको को रोजगार की साथ-साथ शिक्षा में भी सुधार आएगा। शिक्षकों के न होने के कारण हर साल बोर्ड का रिजल्ट प्रभावित हो जाता है। प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा में ग्रेड-तीन में अध्यापकों के लगभग बारह हजार पद खाली हैं। सरकार अगर इन पदों को भरने के लिए योजना बनाती है तो सबसे पहले उन्हें प्रारंभिक शिक्षा से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के पूरे सेट में बदलाव करना होगा। एक तरफ राज्य सरकार ने रीट के परीक्षा का भी ऐलान कर दिया है। यह परीक्षा अगले साल अप्रैल में होनी है, जिसमें 31 हजार पदों पर नियुक्ति प्रस्तावित है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सरकारी स्कूलों की बात करें तो वहां पर 65,545 पद खाली पड़े हैं। बता दें कि पिछले महीनें की रिपोर्ट में बताया गया था कि स्कूलों में खाली पड़े पदों की संख्या 63,950 थी। लेकिन एक महीने में ही ढाई सौ से अधिक लेक्चरर्स रिटायर होने के कारण यह संख्या बढ़ गयी और इनके भी खाली पदों की संख्या बढ़कर तेरह हजार के पार हो गई है।

आरपीएससी की भी 5 हजार लेक्चरर्स की भर्ती में अभी नियुक्ति न शुरू हो पाने के कारण स्कूलों में खाली पदों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यदि वर्तमान में चल रही भर्ती में भी सभी पदों पर नियुक्ति मिल जाती है तब भी इनके 8 हजार पद खाली रह जाएंगे। ऐसे में सरकार पर दबाव है कि पिछले साल दिसंबर में घोषित की गई नई भर्ती की प्रक्रिया भी जल्दी ही शुरू करे।

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