गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है ऐसे में पंखे, कूलर, Fridge आदि चीज़े हर घर में चलना शुरू हो गया है साथ ही मीटर की रीडिंग भी तेज़ी से बढ़ने लगी है ऐसे में अगर बिजली के रेट बढ़ने वाले हैं ये खबर सुनने को मिले तो किसी भी इंसान को झटका लग सकता है। बिजली कंपनियों ने Tariff बढ़ाने के लिए नया दांव खेलते हुए गुपचुप तरीके से फिर वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) दाखिल कर दिया है। बिजली कंपनियां चाहती हैं कि Regulatory Commission अब इसके आधार पर उपभोक्ताओं की बिजली दरें सरकारी सब्सिडी और बिना सब्सिडी के घोषित करने पर विचार करे। बिजली कंपनियों ने Retail Tariff का प्रस्ताव दाखिल नहीं किया है।

बिजली कंपनियों ने इसके पहले भी वर्ष 2021-22 के लिए (एआरआर) दाखिल किया था, लेकिन नियामक आयोग ने 12 मार्च को इसे लौटा दिया। नियामक आयोग ने इसमें कमियां निकालते हुए कहा कि बिजली कंपनियां अनुमोदित बिजनेस प्लान के आधार पर इसे बनाकर दाखिल करें। इसके बाद भी बिजली कंपनियों ने सोमवार की रात गुपचुप तरीके से गोलमोल जबाब के आधार पर एआरआर दाखिल कर दिया। इसे Business Plan के आकड़ों के तहत संशोधित नहीं किया गया।

इतना ही नहीं आयोग द्वारा बिजली कंपनियों को Retail Tariff श्रेणी वाइज दाखिल करने का जो निर्देश दिया था उसे भी बिजली कंपनियों ने नहीं माना। Electricity Consumers Council के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि बिजली कंपनियां चालकी से चोर दरवाजे से उपभोक्ताओं पर आयोग के माध्यम से बोझ डलवाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों ने ग्राउंड रियल्टी पर एआरआर दाखिल किया है। आयोग ने Business Plan में जब वर्ष 2021-22 के लिए वितरण हानिया 11.08 प्रतिशत अनुमोदित किया है तो एआरआर में उसे बढ़ाकर 16.64 प्रतिशत प्रस्तावित करना आयोग आदेश का उल्लंघन है। उपभोक्ता परिषद सभी मुद्दों पर आयोग से बात करेगा और जनहित प्रत्यावेदन भी दाखिल करेगा।

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