रायपुर में विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन करेगी सरकार, प्रदेशभर के आदिवासी होंगे वहाँ जमा

मानव जाति के प्रारंभिक दौर में मनुष्य ने जंगलो को ही अपना आशियाना बनाया था और बाद में आवश्यकतानुसार खुद को समय दर समय समाजिक रुप से विकसित करते गए।  कुछ ऐसे भी लोग थे जो अपने उस दौर की स्थिति से उभर नहीं पाए उसके अलग अलग कारण थे, आज भी समाज में ऐसे लोग हैं जिन्हे हम जनजाति के नाम से भी जानते है या फिर उनके वंशज जो आज भी अपनी संस्कृति के धरोहर को संजोग कर रखना चाहते हैं।

समाज के इस वर्ग का भी अपना अलग ही महत्व है- विश्व आदिवासी दिवस

आज के दिन विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। प्रकृति के सबसे करीब रहनेवाले आदिवासी समुदाय ने कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाई है संसाधनों के आभाव में भी इस समुदाय के लोगों ने अपनी एक खास पहचान बनाई है। गीत-संगीत-नृत्‍य से हमेशा ही आदिवासी समुदाय का एक गहरा लगाव होता है। उनके गीतो-नृत्‍यों में प्रकृति से लगाव का पुट दिखता है।

समाज के इस वर्ग का भी अपना अलग ही महत्व है- विश्व आदिवासी दिवस

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन सरकार ने किया, जिसमें प्रदेशभर के आदिवासी जुटें, जबकि जिला मुख्यालयों में कांग्रेस संगठन स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, आदिवासी मंत्री और विधायक शामिल हुए।

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समाज के इस वर्ग का भी अपना अलग ही महत्व है- विश्व आदिवासी दिवस अनिरुद्ध पूर्ति, अंशु शिखा लकड़ा, निरंजन कुजूर समेत ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने आदिवासी समाज के इस वर्ग से उठकर अपनी एक अलग पहचान बनाई, लेकिन आज भी ये लोग अपनी संस्कृति से उतने ही जुड़े है जितना ये कल थे।

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