Corona वायरस केसों में भले कमी दिख रही हो लेकिन मौतों का तांडव जारी है। पिछले 24 घंटे में 3876 लोगो ने कोरोना संक्रमण से अपनी जान गवा दिए,और तकरीबन 2,76,059 लोग Corona संक्रमण के चपेट में आए है। इसी कड़ी में रोजाना हजारों मौते हो रही है जिससे दफन करने के लिए न तो कफन मिल रहे और न ही जगह जिससे मृतक के परिजन परेशन होकर शव को नदी में प्रवाह कर रहें है। इस सब के बिच एक सवाल उठ रहा है कि आखिर कार भारत में इतने विद्युत शवदाह गृह है उसे प्रयोग में क्यों नहीं लाया जा रहा है।

देश में कोविड की दूसरी लहर लगातार फैल रही है. राज्य में कोरोना संक्रमितों की मरने की रफ्तार भी बढ़ी है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकडे के मुताबिक थोड़ी राहत मिलती दिखई दे रही है, इधर Corona वायरस से मरने वालों की संख्या में इजाफा हुआ तो जिला प्रशासन ने विद्युत शवदाह गृह की बात कहने लगी है। जब विद्युत शवदाह गृह की बात होती है तो तकरीबन चार साल बने संभागका का पहला गैस कम विद्युत शवदाह गृह याद आता है जो यूआईटी और नगर निगम में तालमेल की कमी के कारण उस बक्त चालू नहीं हो पाया था

वही पटना के बांसघाट में दो शवदाहगृह की मशीने चलने के बावजूद शवों को अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इससे पिछले साल की बात करें तो शवों लेकर परिजन घंटो इंतजार के शव का अंतिम संस्कार होता था। हलांकी विद्युत शवदाह गृह में एक शव के अंतिम संस्कार में तकरीबन एक घंटे से ज्यादा का समय लगता है। मशीन के ज्यादा गर्म होने पर उसे थोरी देर के लिए ब्रेक भी देना पड़ता है.

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