कहीं रोते हैं भगवान, कहीं सीढ़ियों में सुनाई देता है संगीत

जब कभी भी मंदिरों का जिक्र होता है तो मन में धर्म और आस्था के भाव आते हैं। मंदिरों में श्रद्धालुओं का हुजूम लगना भारत जैसे देश में आम बात है। लेकिन क्या आपको भारत के मंदिरों से जुड़े रहस्य पता हैं। कुछ ऐसे रहस्य जिनकी गुत्थी आज भी नहीं सुलझ सकी है तो कुछ ऐसे रहस्य भी हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल है। आज हम आपको भारत के मंदिरों से जुड़े कुछ ऐसे ही रहस्यों के बारे में बताएंगे

इस मंदिर में बात करते हैं भगवान !

बिहार के बक्सर में मौजूद है मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर, मान्यता है कि करीब 400 साल पहले भवानी मिश्र नाम के एक तांत्रिक ने इसे बनवाया था। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि मध्यरात्रि के दौरान इस मंदिर से आवाजें सुनाई देती हैं। कहते हैं कि देवी मां की प्रतिमाओं के आपस में बातें करने से ये आवाजें उतपन्न होती हैं। और लोगों को ये आवाजें साफ-साफ सुनाई भी देती हैं। मंदिर में आने वाली आवाजों को लेकर रिसर्च भी की गई लेकिन आज तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है।

गढ़मुक्तेश्वर की अनसुलझी पहेली

गढ़मुक्तेश्वर में मौजूद है प्राचीन शिव गंगा मंदिर, इस मंदिर में एक शिवलिंग है जिस पर हर साल एक अंकुर उभरता है। हैरान करने वाली बात ये है कि जब ये अंकुर फूटता है तो इस पर भगवान शिव के साथ अन्य देवी-देवताओं की आकृतियां बनती हैं। ऐसा कैसे संभव है इसको लेकर कई बार रिसर्च भी की गई। लेकिन ये पहेली आज तक अनसुलझी है। इतना ही नहीं अगर इस मंदिर की सीढ़ियों पर कोई पत्थर फेंकता है तो ऐसी ध्वनी आती है जैसे किसी ने पानी के अंदर फेंका हो। इसका रहस्य भी आज तक नहीं सुलझ पाया है

 बाहर प्रचंड गर्मी लेकिन मंदिर में सर्दी

 उड़ीसा के तितलागढ़ को राज्य के गर्म स्थानों में से एक है। तितलागढ़ में कुम्हड़ के पहाड़ पर एक शिव मंदिर स्थित है। दरअसल इस इलाके में पथरीली चट्टाने हैं जिसकी वजह से यहां प्रचंड गर्मी पड़ती है लेकिन मंदिर में प्रचंड गर्मी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। दरअसल मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं के लिए गर्मी सहन करना मुश्किल हो जाता है लेकिन वहीं मंदिर के अंदर एसी से भी ज्यादा ठंड महसूस होती है। आखिर इसके पीछे की वजह क्या है इस राज से अभी तक पर्दा नहीं उठ पाया है।

वो मंदिर… जहां रोते हैं भगवान !कांगड़ा में स्थित है ब्रजेश्वरी मंदिर…इस मंदिर में भैरव बाबा की एक विचित्र प्रतिमा है। कहते हैं कि जब भी इस इलाके में कोई परेशानी आने वाली होती है तो भैरव बाबा की इस विचित्र प्रतिमा की आंखों से आंसू टपकने लगते हैं। ऐसा क्यों होता है इस राज से अभी तक पर्दा नहीं उठ पाया है।

 इस मंदिर की सीढ़ियों से सुनाई देता है संगीत

 तमिलनाडु का ऐरावतेश्वर मंदिर, जिसका निर्माण 12वीं सदी में चोल राजाओं ने बनाया था।  इस मंदिर का निर्माण एक बेहद ही खास वास्तुशैली के जरिए किया गया है। इस मंदिर की तीन सीढ़ियों की खासियत ये है कि जैसे ही इन सीढ़ियों पर कोई जरा सा भी तेज पैर रख दे तो इन सीढ़ियों से संगीत निकलने लगता है और संगीत की एक नहीं बल्कि अलग-अलग ध्वनियां गूंजने लगती हैं। आखिर ऐसा कैसे होता है। इस राज से फिलहाल पर्दा नहीं उठ पाया है।

वो मंदिर, जो देता है मानसून की जानकारी

क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जो मानसून की जानकारी देता है। आज हम आपको ऐसे ही मंदिर के बारे में बताएंगे। दरअसल कानपुर जिले के बेहटा गांव में भगवान जगन्नाथ का मंदिर है। मिली जानकारी के मुताबिक ये मंदिर 5 हजार साल पुराना है। कहते हैं कि मानसून की दस्तक के ठीक 15 दिन पहले इस मंदिर की छत से पानी टपकने लगता है जिससे इलाके के लोगों को बारिश का अंदाजा हो जाता है। कहते हैं कि अगर मंदिर की छत से बारिश की ज्यादा बूंदें टपकती हैं तो बारिश ज्यादा होती है और अगर बूंदें कम टपकती हैं तो बारिश कम होती है। पुरातत्व विभाग से लेकर कई विशेषज्ञ इन बूंदों को लेकर पड़ताल कर चुके हैं। लेकिन आज तक इस राज़ से पर्दा नहीं उठ पाया है।

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