आज बात प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना की करते है।

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना

गरीब परिवारों को स्वास्थय सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई। मकसद यह था की कोई भी गरीब बीमारी के कारण अपनी जान न गवाएं। उसे स्वास्थय से संबंधी हर तरह की सुविधाएं महैया करवाई जा सके। इस योजना के तहत गरीब परिवार के व्यक्ति का 5 लाख तक का इलाज सरकार उठाएगी। गरीबों की जान बचाने वाली इस योजना ने एक गरीब की जान ले ली।

क्या है पूरा मामला

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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीवन को बचाने वाली योजना आयुष्मान भारत ने किसी की जिंदगी भले ही बचाई हो। मगर मतलूब के लिए यह योजना कहर बनकर टूट गई। बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के दीवानखाना मोहल्ले के रहने वाले मतलूब की हालत सोमवार की रात अचानक खराब हो गई,परिजन और उन्हें बरेली के नामचीन अस्पताल लेकर पहुंचे जहां पर भर्ती करने से पहले परिजनों ने जैसे ही आयुष्मान भारत को कार्ड दिखाया तो उन्हें फिजीशियन ना होने की बात कहते हुए भर्ती करने से इंकार कर दिया।

मतलूब को इसके बाद में स्टेडियम रोड पर बने एक अस्पताल में ले जाया गया स्टाफ उन्हें इमरजेंसी वार्ड में ले जाने लगा था। लेकिन जैसे ही आयुष्मान भारत कार्ड दिखाया तो बेड खाली ना होने की बात कहते हुए उन्हें भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। जबकि परिजनों का कहना है कि उस अस्पताल में बेड खाली था। इतना ही नहीं परिजनों से कहा गया कि 12 हजार रुपए जमा कर दो तो इलाज शुरु कर दिया जाएगा।

आयुष्मान भारत का कार्ड दिखाते ही भर्ती करने से इंकार कर दिया।

इसके बाद परिजन उन्हें लेकर जंक्शन रोड पर बने एक अस्पताल पर पहुंचे जहां पर एंबुलेंस से उतरने की नौबत भी नहीं आई और कार्ड का नाम लेते ही उन्हें भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। परिजन फिर भटकते-भटकते मतलूब को एक मेडिकल कॉलेज में लेकर पहुंचे,वहां पर भी आयुष्मान भारत का कार्ड दिखाते ही भर्ती करने से इंकार कर दिया। कहा कि अगर भर्ती कराना है तो पहले 15 हजार रुपए लेकर आओ और लगभग 50,000 रुपए यहां इलाज में खर्च हो जाएंगे। इसी कशमकश में भागदौड़ करते करते परिजन परेशान हो गए और इलाज ना मिलने के अभाव में मतलूब ने दम तोड़ दिया। इससे पहले पूरे मामले का जिक्र करते हुए बरेली सीएमओ को फोन किया गया उन्होंने भी सुबह लिखित शिकायत देने का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया।

किसी अस्पताल में कार्ड होने के बावजूद भी इलाज नहीं मिल पा रहा है।

बरेली सीएमओ विनीत कुमार शुक्ला का कहना है कि ऐसे पहले भी मामले आए हैं जिसमें आयुष्मान भारत कार्ड होते हुए भी मरीज को इलाज नहीं मिल पाया और इसकी शिकायत मिलने पर उन्होंने कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि मतलूब के परिजनों ने रात में उन्हें फोन किया था,और बताया था कि किसी अस्पताल में कार्ड होने के बावजूद भी इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा इसमें हमने टीम गठित कर रखी है मामले की जांच की जाएगी और उक्त अस्पतालों के प्रबंधन को बुलाकर बात की जाएगी कि आखिर ऐसा क्यों हुआ और अगर मामले में सत्यता मिलती है। तो  उक्त अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अगर किसी की जान बचाने वाली योजना का मात्र कार्ड दिखाने भर से ही उसके साथ इस तरह का व्यवहार किया जाए तो फिर आखिर इन योजनाओं को शुरु करने से क्या फायदा। अगर इस आयुष्मान भारत की जमीनी हकीकत यह है तो फिर सरकार अब तक कुछ कर क्यूं नहीं पाई है। सवाल बहुत सारे है लेकिन उनका जबाव कब मिलेगा यह सबसे बड़ा सवाल है?