जापान की राजधानी टोक्यो में खेले जा रहे Olympic खेलों में Indian Women Hockey Team ने इतिहास रच दिया है। टीम ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हराकर पहली बार सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। जीत की ख़ुशी में हर भारतीय को फिल्म ‘चक दे! इंडिया’ याद आ गई। फिल्म में कबीर खान वाली भूमिका में शाहरुख खान नजर आए थे। शाहरुख खान ने फिल्म में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए तरह-तरह के मापदंडों का प्रयोग किया था। खिलाड़ियों में जीत की भूख पैदा हो इसलिए फिल्म में कई ऐसे सीन्स भी शामिल किए गए जिसे देखकर आज भी लोग भावुक हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं रील लाइफ के अलावा रियल लाइफ में महिलाओं की हॉकी टीम के कोच कौन हैं?

Coach Sjoerd Marijne अब किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। चार साल पहले जब Sjoerd Marijne ने Indian Women Hockey Team की कमान संभाली थी, तब हालात जुदा थे। कई सीनियर प्‍लेयर्स रिटायर हो रहे थे। टीम को फिर से खड़ा करने की जरूरत थी और Sjoerd Marijne ने यह काम बखूबी किया। आज तोक्‍यो Olympic में ऑस्‍ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को हराने पर हमें जो खुशी है, उसकी एक बड़ी वजह मारजेन हैं। मारजेन से इस टीम को संवारा और तराशा है। आज भारत की महिला हॉकी टीम दुनिया के सबसे बड़े खेलमंच पर अगर यूं खेल पा रही है तो Sjoerd Marijne ही उसके असली हकदार हैं।

चार साल पहले Indian Hockey Team से जुड़ने वाले Sjoerd Marijne मैच जीतने के बाद भावुक नजर आए। वह एक कोने में खड़े होकर बस अपने खिलाड़ियों को टकटकी निगाहों से देख रहे थे। Sjoerd Marijne की खुशी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी आंखों से लगातार आंसू निकल रहे थे, जाहिर सी बात है कि यह आंसू खुशी के थे।

Olympic के इतिहास में पहली बार। 1980 के बाद उसे 36 साल तक Olympic में जगह बनाने का इंतजार करना पड़ा। हालांकि वह Olympic भी भुला देने वाल रहा। सभी मैच हारे। तोक्यो में भी किसी करिश्मे की उम्मीद नहीं थी। शुरुआत भी वैसी ही हुई। तीन हार, लगातार। पर फिर तस्वीर पलटी। एक के बाद एक लगातार तीन जीत। और अब भारतीय महिला हॉकी टीम खिताबी मुकाबले से बस एक कदम दूर है।

Sjoerd Marijne वह शख्स हैं जिन्हें इस टीम पर भरोसा था। वह भी तब जब ज्यादातर लोगों को नहीं था। वह Women Hockey Team के कोच हैं। वह टीम के साथ चार साल से काम कर रहे थे। टीम को बदल रहे थे। उसकी फिजिकल फिटनेस। उसकी रणनीति को। उसके खेलने के तरीके को। और सबसे बढ़कर उसकी सोच को। वह जानते हैं कि खेल मैदान से पहले दिमाग में खेला जाता है। मैदानी रणनीति, चतुराई, चपलता और दमखम से पहले मानसिक रूप से उसकी रूपरेखा तैयार करनी होती है। खेल कोई भी हो मानसिक रूप से मजबूत हुए बिना उसे जीत पाना बहुत मुश्किल है।

मैच के बाद Sjoerd Marijne ने अपने दिल की बात कही। वह जानते थे कि मुकाबला कड़ा था। ऑस्ट्रेलिया दुनिया की चोटी की टीम है। बेहद मजबूत। आक्रामक और ताकत से पलटवार करने वाली। भारत के खिलाफ गोल खाने के बाद भी वह रुक नहीं रही थी लेकिन डिफेंस की अभेद्य दीवार के पार वह जा नहीं सकी। Sjoerd Marijne ने कहा, ‘मेरा दिल कैसा है? यह अब भी काम कर रहा है। मैं सोच रहा था ggahhh लेकिन बीते तीन मैचों में मेरे साथ ऐसा ही हो रहा है।’

Indian Defense की खूब तारीफ हो रही है लेकिन नीदरलैंड्स के इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा कि डिफेंस बहुत ज्यादा मजबूत नहीं था। उन्होंने कहा, ‘डिफेंस बहुत ज्यादा अच्छा नहीं था खास तौर पर सर्कल में डिफेंड नहीं कर पाए। तो हम उस पर ध्यान रखेंगे। इससे आपका ध्यान जीत और हार से इतर पर रहता है।’

Sjoerd Marijne ने कहा, ‘यह माइंडसेट की बात है। मैंने लड़कियों से कहा था, हमारे पास खोने के लिए कुछ है नहीं, तो खुलकर खेलो और उन्होंने आज यही किया। यह सपने के पूरे होने की तरह है। यह वाकई चक दे इंडिया मूवमेंट ही था।’

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