कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी जी की अराधना करने का होता है विशेष महत्व

कोरोना काल के बीच सारे त्यौहार घर पर रहकर ही मनाए जा रहे है। ऐसे में कार्तिक पूर्णिमा किस तरह घर पर मनाई जाए यही बात सोचकर सब परेशान है। कार्तिक माह विष्णु का माह माना जाता है। इस माह की पूर्णिमा का भी विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भक्तजन पवित्र नदियों में स्नान के लिए जुटते हैं और देव दिवाली भी इसी दिन मनाई जाती है। बता दें कि र्तिक मास को मंगल मास कहा गया है। इस पूरे माह में जल की प्रधानता होती है। ऋग्वेद के सातवें मंडल के सूक्त 49 में ऋषि वशिष्ट धरती के वासियों के लिए आह्वान करते हैं कि- दिव्य जल, आकाश से बारिश के माध्यम से प्राप्त होते हैं, जो नदियों में सदा गमनशील हैं, खोदकर जो कुएं और तालाब से निकाले जाते हैं और जो सभी जगह प्रवाहित होकर पवित्रता बिखेरते हुए समुद्र की ओर जाते हैं, वे दिव्यतायुक्त पवित्र जल हमारी रक्षा करें।

जानकारी के लिए बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा को श्रीहरि ने प्रलय काल में चार वेदों की रक्षा के लिए मत्स्यावतार लिया था। इसी पूर्णिमा के दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया और त्रिपुरारी के नाम से जाने गये। इसी पूर्णिमा के दिन बैकुंठधाम में श्रीतुलसी का प्रकाट्य हुआ। देवी तुलसी का पृथ्वी पर जन्म हुआ। इसलिए इस दिन भी तुलसी जी की अराधना करना चाहिए। शरद पूर्णिमा के बाद चंद्रमा से निकलने वाली अमृतदायी किरणों का प्रभाव पूरे कार्तिक मास में रहता है। चंद्रमा की मधुरिमा से सरोवर, सरिता और जलकुंड में एक शक्ति का संचयन होता है। इस कारण कार्तिक मास में जलस्नान का विधान है।

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