केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में Jitin Prasada ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। बेदाग छवि और उत्तर प्रदेश की राजनीति में दबदबा रखने वाले जितिन प्रसाद एक बड़ा ब्राह्मण चेहरा भी हैं। यूपी की राजनीति उनका यह कदम उथल-पुथल लाने वाली घटना के साथ कांग्रेस के लिए बड़ा झटका भी है। यूपी के शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के युवा चेहरे Jitin Prasada ने दो बार लोकसभा चुनाव जीत कर मनमोहन सिंह की कैबिनेट में मानव संसाधन विकास मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय में राज्यमंत्री का दायित्व संभाला।
Jitin Prasada के परिवार का कांग्रेस और देश की राजनीति से पुराना नाता रहा है। उनके पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के पुराने नेता रहे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार उनको उत्तर प्रदेश की धौरहरा सीट से भाजपा चुनाव लड़ा सकती है। जितिन प्रसाद का जन्म 29 नवंबर, 1973 को यूपी के शाहजहांपुर में हुआ। उन्होंने अपनी पढ़ाई देहरादून के दून स्कूल से की और फिर दिल्ली चले गए। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम ऑनर्स किया। बीकॉम करने के बाद उन्होंने आइएमआइ नई दिल्ली से एमबीए किया। इसके बाद Jitin Prasada बैंक में नौकरी करने लगे। उनके राजनीति सफर की शुरुआत 2001 में भारतीय युवा कांग्रेस के सेक्रेटरी के रूप मे हुई थी। वह लोकसभा चुनाव 2004 में अपने गृह जनपद शाहजहांपुर से पहली बार सांसद चुने गए।

UP की राजनीति में दबदबा के चलते वर्ष 2008 में Jitin Prasada को मनमोहन सिंह सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया। जितिन प्रसाद की जीत का सिलसिला जारी रहा और 2009 के आम चुनाव में वह धौरहरा सीट से सांसद चुने गए। इनाम के तौर पर कांग्रेस ने उनको एक बार फिर केंद्र में मंत्री पद से नवाजा और वह 2009 से 2011 तक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री रहे।

मनमोहन सिंह सरकार में Jitin Prasada को 2011-12 में पेट्रोलियम मंत्रालय की भी जिम्मेदारी दी गई। 2012 से 14 में वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री भी रहे। Jitin Prasada कांग्रेस के उन नेताओं में से एक हैं, जिनको कांग्रेस आलाकमान और राहुल-प्रियंका का बेहद करीबी माना जाता रहा है।

मध्य प्रदेश के दिग्गज कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के समय भी उनका नाम काफी उछला था। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के हितों की रक्षा के लिए उन्होंने अपने संरक्षण में ‘ब्राह्मण चेतना परिषद’ बयाया है। इसके जरिए उन्होंने ब्राह्मणों को जोड़ने का अभि‍यान शुरू किया है।

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