महिलाओं ने भिन्न-भिन्न परिधानों में सज-संवर कर परम्परागत लोक गीत गाए। वहीं भाइयों ने बहनों को उपहार इत्यादि अर्पित कर समंदर हिलोरने की प्रथा का निर्वहन किया।

जालोर शहर में आज रविवार को समंदर हिलोरने का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस पर्व के तहत देवासी समाज क़ी महिलाओं ने बड़े ही धूम धाम से सज-धज कर अपने भाइयों के साथ तालाब या अन्य प्राकृतिक जल स्त्रोत पर जाकर इस रस्म को निभाया। शहर में भी रविवार को महिलाएं सज धजकर मंगलगीत गाते हुए, नाचती हुई सुंदेलाव तालाब पहुंची, जहां उन्होंने अपने-अपने भाइयों के साथ समुंदर हिलोरने की रस्म अदा की। इस दौरान भाइयों ने भी बहनों को आशीर्वाद देने के साथ उपहार भी दिए।

समंदर हिलोरने क़ी एक रस्म को भाई-बहन ने प्रेम-पूर्वक निभाया, जानें पूरी रस्म...

रविवार को भाई-बहनों ने समंदर हिलोरा तथा एक-दूसरे को पानी पिलाकर उपहार इत्यादि भेंट किए। इस पर्व पर वस्त्राभूषण से सुसज्जित स्त्री-पुरुष  ढ़ोल-मंजीरे की छनकती आवाज़ में, डीजे की स्वरलहरियों पर नाचते-गाते सुंदेलाव तालाब पहुंचे और पौराणिक परम्परा के अनुसार समंदर हिलोरने की रस्म अदा की। सर पर मटका लेकर तलाब पर पहुंची नवविवाहित महिलाएं व उनके भाई जिन्होने तलाब के पानी में मटके को हिलाया तथा एक-दूसरे को अपने हाथों से पानी पिलाकर एक दूसरे के स्वस्थ्य जीवन व लंबी उम्र की कामना की।

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महिलाओं ने भिन्न-भिन्न परिधानों में सज-संवर कर तालाब के चारों ओर परिक्रमा लगाते हुए परम्परागत लोक गीत गाए। वहीं भाइयों ने बहनों को उपहार इत्यादि अर्पित कर समंदर हिलोरने की प्रथा का निर्वहन किया। साथ ही भाइयों ने बहन को चुनरी ओढ़ाकर अपने हाथ से पानी पिलाया। बुजुर्गों ने सुंदेलाव तालाब पर प्रेम-सभा का आयोजन किया। प्रसादी के रूप में गुड़, आटे व घी से बनी सकली को कार्यक्रम में मौजूद लोगों मे वितरित किया गया।

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