किसान आंदोलन को एक महीना पूरा, खेत की जगह अब भी सड़कों पर है देश का किसान

कड़ाके की ठंड, कोरोनावायरस का ख़तरा और देश का किसान अभी भी सड़कों पर है। आज किसान आंदोलन को एक महीना पूरा हो चुका है बावजूद इसके किसानों की समस्या का समाधान होता नज़र नहीं आ रहा है। प्रदर्शनकारी किसान आज धिक्कार दिवस मना रहे हैं।

भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने सभी इकाइयों से 26 दिसंबर को जब दिल्ली के विरोध का एक माह पूरा हो रहा है ‘धिक्कार दिवस’ तथा ‘अम्बानी, अडानी की सेवा व उत्पादों के बहिष्कार’ के रूप में कॉरपोरेट विरोध दिवस मनाने की अपील की है। सरकार का धिक्कार उसकी संवेदनहीनता और किसानों की पिछले सात माह के विरोध और ठंड में एक माह के दिल्ली धरने के बावजूद मांगें न मानने के लिए किया जा रहा है।

संगठन ने आरोप लगाया है कि सरकार ‘तीन कृषि कानून’ व ‘बिजली बिल 2020’ को रद्द करने की किसानों की मांग को हल नहीं करना चाहती। आईकेएससीसी के वर्किंग ग्रुप ने कहा कि सरकार का दावा कि वह खुले मन से सहानुभूतिपूर्वक वार्ता कर रही है, जो एक छलावा है। उसका दिमाग पूरी तरह से बंद है और कानूनों में कुछ सुधारों पर अड़ा हुआ है। वह देश के लोगों को धोखा और किसान आंदोलन को बदनाम करना चाहती है। उसकी योजना है कि यह दिखा कर कि किसान वार्ता के लिए नहीं आ रहे, वह किसानों को हतोत्साहित कर दे, विफल हो जाएगी। किसान नेताओं ने कभी भी वार्ता के लिए मना नहीं किया। वे किसी भी तरह की जल्दी में नहीं हैं और कानून वापस कराकर ही घर जाएंगे।

24 दिसंबर को सरकार के पत्र में तीन दिसंबर की वार्ता में चिन्हित मुद्दों का बार-बार हवाला है, जिन्हें सरकार कहती है, उसने हल कर दिया है और वह उन अन्य मुद्दो की मांग कर रही है, जिन पर किसान चर्चा करना चाहते हैं। बता दें कि पिछले सात माह से चल रहे संघर्ष, जिसमें दो लाख से अधिक किसान पिछले 30 दिन से अनिश्चित धरने पर बैठे हैं, की समस्या को हल करने को सरकार राज़ी नहीं है।

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