आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देगा सरकार का यह कॉन्ट्रैक्ट

कुछ दिन पहले पीएम मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलो के मुद्दों पर कैबिनेट में बैठक हुई थी। इस बैठक में 83 स्वदेशी तेजस एमके-1ए जेट विमानों की खरीद को मंजूरी दी गयी थी। यह सभी विमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स  लिमिटेड (एचएएल) द्वारा बनाए जाएंगे। पिछले साल पास हुई नयी रक्षा नीति के तहत यह विमान भारत में ही डिज़ाइन, विकसित और निर्मित किये जाएंगे। नयी रक्षा नीति को आगे बढ़ाने का भारत का यह पहला कदम होगा।

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बता दें , तेजस विमान ऐसा पहला लड़ाकू विमान है जिसके 50 फीसदी से ज्यादा पुर्जे स्वदेशी हैं। कैबिनेट ने वायु सेना के  बेस रिपेयर डिपो में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को भी मंजूरी दे दी है। इस विकास को मंजूरी देने से वायु सेना के ग्राउंड ड्यूटी वर्कर्स का काम आसान हो जाएगा। लड़ाकू विमानों की देखभाल और मरम्मत का काम बहुत कम वक्त में हो जाया करेगा। यह बात तोह साफ़ होगयी की अब हलके लड़ाकू विमानों का निर्माण एचएएल द्वारा भारत में ही हो जाएगा जिससे आत्मनिर्भर भारत अभियान और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगी। इस तरह यह कार्यक्रम देश की रक्षा प्रणालियों  में विकास की ओर बहुत बड़ा कदम साबित होगा। बता दें, इस सौदे में भारत एचएएल से  83 विमानों में 73 एलसीए तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमान और 10 तेजस एमके-1 प्रशिक्षण विमान खरीदेगा।

इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने 40 तेजस विमानों की खरीद को मंजूरी दी और अब 83 और विमानों को मंजूरी देने के बाद अब भारतीय वायु सेना में जल्द ही 123 तेजस विमान शामिल होंगे। एचएएल ने तेजस विमानों की पहली खेप 2024 तक वायुसेना को प्रदान करने की संभावना जताई है और 2029 तक पूरी खेप प्रदान करने का लक्ष्य रखा है। आने वाले समय में यह तेजस विमान भारत की ताकत और दुश्मनों की चिंता का कारण बन सकते हैं।

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