कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया है, हर कोई इसकी चपेट में है। पर इस महामारी ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है स्कूल के बच्चों को। स्कूलों, समुदाय और बच्चों पर लॉकडाउन का प्रभाव आनुपातिक रूप से बहुत अधिक है। भारत में स्कूली शिक्षा पर रिपोर्ट, 2016-2017 के अनुसार, भारत में 1.4 मिलियन स्कूल हैं, ।.2 मिलियन बच्चे सरकारी स्कूलों में कक्षा 1-8 से नामांकित हैं और अतिरिक्त 38 लाख बच्चे मानक 9-10 में नामांकित हैं। भारत की लगभग 29% जनसंख्या बच्चे हैं, और 19.29 % 6-14 वर्ष के आयु वर्ग में हैं।

यह समूह कानूनी रूप से अधिकार के तहत शिक्षा का हकदार है बच्चों का स्कूल अब घर आ चुका है। बच्चे अपना वक्त आनलाइन क्लासेज़ को दे रहे हैं। तकनीक के इस युग ने शिक्षा की भी परिभाषा को कहीं-न-कहीं बदला है। आनलाइन टेस्ट, आनलाइन इग्ज़ाम, यहाँ तक की दोस्तों से भी आनलाइन ही मिल पाना हो रहा है। आनलाइन पढ़ाई के अलावा बच्चे समय आनलाइन गेम्स को दे रहें हैं। तरह- तरह के गेम्स ने बच्चों को इस तरह उलझाया है मानों वहाँ उन्होनें अपनी एक अलग ही दुनिया बना ली हो।

बच्चे अपना वक्त बिंज वाचिंग में भी लगा रहें हैं। Netflix, Amazon जैसे प्लैटफार्म ने बच्चों को एक अलग ही दुनिया से मिलवा दिया है। लॉकडाउन ने 321 मिलियन भारतीय बच्चों को स्कूल से दूर कर दिया है, जिससे बच्चों में मानसिक तनाव का खतरा भी बढ़ता दिख रहा है। बच्चों के साथ- साथ अभिभावक भी चिंतित हैं। बच्चों ने अपने घर को ही अब स्कूल, प्ले-ग्राउंड सब बना लिया है। पढ़ाई- लिखाई के अलावा अपने अभिभावकों के साथ समय बिताना यही इनका दिनचर्या हो गया है।

Pooja yadav

AB STAR NEWS  के  ऐप को डाउनलोड  कर सकते हैं. हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम  और यूट्यूब पर फ़ॉलो कर सकते है