होली स्पेशल:  जानिए कैसे शुरु हुई थी होली मनाने की परंपरा

होली का ये त्यौहार अपने आप में कई रंग समेटे हुए है और इससे जुड़ी कई कहानियां का जिक्र भी पौराणिक कथाओं में मिलता है। उन्हीं में से एक है भक्त प्रह्लाद की कहानी। पौराणिक कथा के मुताबिक असुरों का शक्तिशाली राजा हिरणकश्यप खुद को भगवान मानता था। वो चाहता था कि हर कोई उसे भगवान मानें और उसकी पूजा करे। असुरों ने हिरणकश्यप को भगवान मानना शुरु कर दिया था और उसकी पूजा करनी शुरु कर दी थी। लेकिन हिरणकश्यप का बेटा प्रह्लाद उसे भगवान नहीं मानता था, इसी वजह से प्रह्लाद ने हिरणकश्यप की पूजा करने से इंकार कर दिया था और हिरणकश्यप की जगह प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की पूजा करनी शुरु कर दी। बेटे को भगवान विष्णु की पूजा करने से रोकने के लिए हिरणकश्यप ने कई यातनाएं दी लेकिन प्रह्लाद अपने इरादों से टस से मस नहीं हुआ। फिर क्या था हिरणकश्यप ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर एक योजना बनाई। दरअसल होलिका को वरदान में एक कपड़ा मिला था जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसे किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकती थी। फिर क्या था एक विशाल चिता सजाई गई। जिस पर होलिका प्रह्लाद के साथ बैठ गई। लेकिन जैसे ही आग जली कपड़ा उड़कर प्रह्लाद के ऊपर चला गया और होलिका जलकर राख हो गई। तभी से होली के त्यौहार को बुराई पर अच्छाई के त्यौहार के रुप में मनाया जाता है।

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