सालों बाद भी Emergency की बात सुनकर लोगों की नींदें उड़ जाती हैं। आज से करीब 44 साल पहले 25 जून, 1975 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था। देश में यह Emergency 21 महीनों तक यानी 21 मार्च, 1977 तक चला था। उस वक्त 25 जून और 26 जून की मध्य रात्रि में तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के हस्ताक्षर करने के साथ ही देश में पहला आपातकाल लागू हुआ था। Emergency लागू करने का दिन यानी 25 जून भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काले दिन के तौर पर दर्ज है क्योंकि करीब दो सालों तक देश ने दमन का एक नया रूप देखा जिसने ब्रिटिश राज के जख्‍म हरे कर दिए। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस कदम पर अमेरिका की नजर थी क्योंकि उनके घर में एक अमेरिकी जासूस मौजूद था।

26 जून 1975 को इंदिरा गांधी के देश में Emergency घोषित करने के एक दिन बाद अमेरिकी दूतावास के केबल में कहा गया था कि इस फैसले पर वह अपने बेटे संजय गांधी और सेक्रेटरी आरके धवन के प्रभाव में थीं। केबल में लिखा था, ‘पीएम के घर में मौजूद ‘करीबी’ ने यह कन्फर्म किया है कि दोनों किसी भी तरह इंदिरा गांधी को सत्ता में बनाए रखना चाहते थे।’ यहां दोनों का मतलब संजय गांधी और इंदिरा गांधी के प्राइवेट सेक्रेटरी आरके धवन से था। धवन ने बताया था कि पश्चिम बंगाल के तत्कालीन सीएम एसएस राय ने जनवरी 1975 में ही इंदिरा गांधी को Emergency लगाने की सलाह दी थी।

इमर्जेंसी की योजना तो काफी पहले से ही बन गई थी। धवन ने बताया था कि तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद को Emergency लागू करने के लिए उद्घोषणा पर हस्ताक्षर करने में कोई आपत्ति नहीं थी। वह तो इसके लिए तुरंत तैयार हो गए थे। धवन ने यह भी बताया था कि किस तरह Emergency के दौरान मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर उन्हें निर्देश दिया गया था कि आरएसएस के उन सदस्यों और विपक्ष के नेताओं की लिस्ट तैयार कर ली जाए, जिन्हें अरेस्ट किया जाना है। इसी तरह की तैयारियां दिल्ली में भी की गई थीं।

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