शिव-पार्वती के पुनर्मिलन की गाथा है हरियाली तीज, जानें क्या है खास..

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हरियाली तीज उत्तर भारत मे मनाया जाने वाला खास त्यौहार है मारवाड़ी समाज की और से होगे खास आयोजन।

यह पर्व हर वर्ष सावन माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। हरियाली तीज, जिसे श्रावणी तीज के नाम से भी जाना जाता है। सावन के महीने में चारों ओर हरियाली फैली होती है इस वजह से इसे हरियाली तीज कहा जाता है। यह पर्व शनिवार को  धूमधाम से मनाया जाएगा।

मारवाड़ी समेत विभिन्न समाज की सुहागन स्त्रियां उत्सव की तैयारी में जुटी हैं। खाटू श्याम मंदिर समेत कई स्थानों पर विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। साथ ही कई तरह की प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी।

हरियाली तीज शिव – प्रार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य मे मनाया जाता है इस पर्व पर महिलाएं व्रत रखती है झूला झूलती है लोकगीत गाती है खुशियां मनाती है कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सब दुख दर्द दूर हो जाते है।

बहन बेटीयों को भेजा जाता है शगुन

इस पर्व पर महिलाएं पूरे दिन व्रत करती है और अपने पति समेत पूरे घर के सुख की कामना करती है लड़की के मायके से उसकी ससुराल में शगुन के रूप में कपड़े, गहने, शृंगार का सामान, मेहंदी, मिठाई और फल आदि भेजे जाते हैं।

पूजन का मुहूर्त

पं. राधेश्याम शास्त्री ने शास्त्री ने बताया कि श्रावण शुक्ल पक्ष तृतीया यानी हरियाली तीज को सुबह 11.30 बजे से 1.30 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त है। दोपहर 3.18 बजे से पौधरोपण का मुहूर्त है। हालांकि तीज की तिथि रात 10 बजे तक है।