ये बप्पा की विशालकाय मूर्ति भव्यता का प्रतीक है जो ‘भव्य’ शब्द को पुनर्परिभाषित करती है।

लालबागचा राजा मुंबई में सबसे प्रतिष्ठित और विशाल गणेशोत्सव पंडालों में से एक है। ये बप्पा की विशालकाय मूर्ति भव्यता का प्रतीक है जो ‘भव्य’ शब्द को पुनर्परिभाषित करती है। सबसे अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ यहाँ जुटती है। हर साल यहाँ लालबागचा राजा को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं कतार लगी रहती है इनके एक दर्शन मात्र के लिए। कभी कभी तो यह प्रतीक्षा 24 घंटे से भी अधिक समय तक करनी पड़ती है। बस ये लालबागचा राजा या यूं कहें लालबाग के राजा के लिए प्यार और विश्वास है लोगों का।

आपको बता दें कि लालबागचा राजा के बारे में कुछ ऐसे आकर्षक तथ्य हैं जिन्हें आप वहाँ जाकर ही महसूस कर सकते हैं। तो चलिये आपको बताते हैं कि इस वर्ष गणेश पूजा के दौरान क्यों जाना चाहिए।

  • पहली सबसे बड़ी बात कि इस वर्ष लालबागचा राजा पंडाल की थीम बहुत ही अनोखी और आकर्षक है। जो इसरो एवं हिंदुस्तान की बहुत महत्वाकांक्षी परियोजना चंद्रयान-2 के आसपास केंद्रित है। इस साल पंडाल में मिल्की-वे, स्पेसशिप और बहुत कुछ है।
  • इस वर्ष पंडाल में जो गणेश प्रतिमा रखी गई है वह 20 फीट ऊंची है।
  • लालबागचा राजा के दर्शन के लिए कोई विशेषाधिकार नहीं दिए गए हैं। लोग बॉलीवुड हस्तियों और अन्य ए-लिस्टर्स के साथ शौक से पंडाल में दर्शन कर सकते हैं।

लालबागुचा राजा पंडाल में हर साल करीब एक लाख लोग आते हैं और इस साल त्योहार के लिए संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

  • मूर्तिकार संतोष कांबले ने बप्पा को तराश के आकर्षक रूप दिया है जबकि पंडाल स्थापना नितिन देसाई के दिमाग की उपज है। नितिन देसाई जो कि बॉलीवुड के सबसे प्रसिद्ध कला निर्देशकों में से एक हैं।
  • गणेशोत्सव के अंतिम दिन यानि कि गणेश विसर्जन के दिन लालबागचा राजा का जुलूस सुबह लगभग 10 बजे शुरू होता है और अगले दिन समापन होता है।
  • लालबागुचा राजा का विसर्जन जुलूस सभी धर्मों के सम्मान और एकजुटता की खातिर लगभग दो मिनट के लिए अग्रीपाड़ा की हिंदुस्तानी मस्जिद में रुकता है। यह शायद एकमात्र ऐसा समय होता है जब ढ़ोल की थाप और उत्सव मस्जिद के सम्मान में थम जाता है।

विसर्जन जुलूस की भी अपनी ही एक भव्यता है। जब भी यह जुलूस बाइकुला के दमकल केंद्र को पार करता है तो यहां सभी फायर ट्रक के सायरन लालबागचा राजा के सम्मान के लिए एक साथ बज उठते हैं।

  • अंतिम चरण का विसर्जन गिरगाँव चौपाटी में होता है जहां मूर्ति को अरब सागर में विसर्जित किया जाता है। यहाँ विसर्जन के वक़्त लाखों श्रद्धालू जमा होते हैं।
  • विसर्जन के वक्त काफी चौकसी का माहौल होता है। सुरक्षा की दृष्टि से पेट्रोलिंग बोट्स और भारतीय नौसेना अभी से तैनात हैं साथ ही किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए डाइविंग टीमों को भी तैनात किया गया है।

    आखिर क्यूं मनाई जाती है गणेश चतुर्थी?

लालबागचा राजा की तैयारी हर साल मई के आसपास से शुरू हो जाती है, लेकिन गणेशोत्सव का अंतिम दिन हर बार अश्रुपूर्ण हो जाता है। जैसे ही समुद्र में मूर्ति को विसर्जन के लिए उतारा जाता है, भक्तों की भीड़ अपने इष्ट को एक अश्रुपूर्ण विदाई देती है। बावजूद इसके मुंबई को फिर अगले साल अपने प्रिय लालबागचा राजा की वापसी का इंतजार रहता है।