देश का किसान खेतों को छोड़ एक बार फिर से सड़कों पर, अपनी मांगों को लेकर कर रहा है विरोध प्रदर्शन

भारत में किसानों की समस्याओं की लगातार अनदेखी होती आ रही है। जिसके चलते आये दिन किसान मजबूरन सड़कों पर उतर आते है। किसान एक बार फिर से सड़कों पर उतर आया है, इस बार किसान सहारनपुर से दिल्ली की ओर पैदल यात्रा कर अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज कर रहे हैं। अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर किसान और मजदूर भारतीय किसान संगठन के नेतृत्व में हजारों किसानों ने आज नोएडा से दिल्ली की ओर कूच कर दिया है। हजारों की संख्या में ये किसान अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर मोदी सरकार के सामने रखने के लिए सहारनपुर से पैदल यात्रा करते हुए आ रहे हैं।

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भारतीय किसान संगठन के उपाध्यक्ष राधे ठाकुर ने  बताया कि सहारनपुर से दिल्ली के लिए निकली ‘किसान-मजदूर यात्रा’ में हजारों किसान शामिल हैं। सहारनपुर से दिल्ली के किसान घाट तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में किसानों की हालत दयनीय है और किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ रखे सो रही है।

उन्होंने  कहा कि समय से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो रहा। योगी सरकार बिजली की दर बढ़ाकर किसान की कमर तोड़ रही है और कर्ज के चलते किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। इसी के चलते देश के किसान को दिल्ली पैदल आने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जब तक किसानों की मांगों के बारे में सरकार कोई ठोस आश्वासन नहीं देती तब तक किसान दिल्ली छोड़ने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार तो सरकार है लेकिन विपक्ष भी किसानों को लेकर गंभीर नहीं है। विपक्ष के निष्क्रिय होने के कारण किसानों को खेती का काम छोड़कर सड़कों पर आने को विवश होना पड़ रहा है। हालांकि विपक्ष दलों में से महज राष्ट्रीय लोकदल ने ही समर्थन किया है और अपने प्रतिनिधिमंडल को भी भेजा है। इसके अलावा बाकी दलों को कोई समर्थन नहीं मिला है।

किसान संगठनों की प्रमुख मांगें

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  1. भारत के सभी किसानों के कर्जे पूरी तरह माफ हों।
  2. किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त मिले।
  3. किसान व मजदूरों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य मुफ्त।
  4. किसान-मजदूरों को 60 वर्ष की आयु के बाद 5,000 रुपये महीना पेंशन मिले।
  5. फसलों के दाम किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में तय किए जाएं।
  6. खेती कर रहे किसानों की दुर्घटना में मृत्यु होने पर शहीद का दर्जा दिया जाए।
  7. किसान के साथ-साथ परिवार को दुर्घटना बीमा योजना का लाभ मिले।
  8. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट और एम्स की स्थापना हो।
  9. आवारा गोवंश पर प्रति गोवंश गोपालक को 300 रुपये प्रतिदिन मिलें।
  10. किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान ब्याज समेत जल्द किया जाए।
  11. समस्त दूषित नदियों को प्रदूषण मुक्त कराया जाए।

भारत में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो।

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ऐसा पहली बार नहीं है कि किसान अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतर आये हों। इससे पहले भी देशभर से हजारों की संख्या में किसानों ने दिल्ली में आकर अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज करवाया था। लेकिन इसके बावजूद भी सरकार ने किसानों की समस्याओं का अभी तक कोई हल नहीं निकाला। हालांकि मोदी सरकार ने जरुर 2000 रु किसानों के खातों में डालकर थोड़ी सहुलियत जरुर दी है। लेकिन इससे किसानों की मूलभुत समस्याओं का अंत होता नहीं दिख रहा है। जिसके चलते एक बार फिर किसानों का विरोध प्रदर्शन सड़कों पर हमें देखने को मिल रहा है।