गणतंत्र दिवस के दौरान दिल्ली में जो बवाल हुआ उसने भारत को शर्मसार कर दिया। गणतंत्र के पावन मौके पर ऐसे बवाल की कल्पना किसी ने नहीं की थी। लेकिन अब इस बवाल के बाद क्या? क्या इस बवाल का किसान आंदोलन पर कुछ असर पड़ेगा। क्या इस हिंसा से किसान आंदोलन की आगे की राह मुश्किल हो गई है ये सवाल हर किसी के मन में घूम रही है। बता दें कि किसानों ने एक फरवरी को संसद कूच करने का फैसला किया था जिसके बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या किसान इस फैसले पर दोबारा विचार करेंगे

दरअसल जब किसान पिछले दो महीनों से धरने पर बैठे थे तब देश की जनता का किसानों का पूरा साथ मिल रहा था। यही वजह थी किसान नेताओं के साथ सरकार भी 11 दौर की बातचीत कर चुकी है लेकिन गणतंत्र दिवस के दिन हुई घटना के बाद किसान आंदोलन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। और अब माहौल बदलने के कयास भी लगाए जा रहे हैं।

72वें गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा भारत

दरअसल लाल किले से जो तस्वीर सामने आई है उसने कई सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल तो ये की आखिर किसान आंदोलन की आड़ में देश की गरिमा से खिलवाड़ क्यों किया गया। ऐसा पहली बार हुआ जब लाल किले की प्राचीर पर तिंरगे की जगह कोई धार्मिक झंडा लगाया गया हो। इसके अलावा जगह जगह पर पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की जो तस्वीरें सामने आई हैं उन्होंने भी किसान आंदोलन के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिल्ली में जो कुछ भी हुआ उसके बाद विपक्ष इस पूरे मामले से किनारा करता नजर आ रहा है वहीं दूसरी ओर सरकार पूरे मामले पर खामोश नजर आ रही है। जाहिर है सरकार फिलहाल किसान नेताओं पर किसी भी तरह के सीधे हमले करने से बच रही है। लेकिन इतना तो तय है कि देश में किसानों के पक्ष में जो माहौल बन रहा था उसमें अब बदलाव देखने को मिलेगा।

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