जेल की हवा भला किसको पसंद है। जेल न जाना पड़े इसके लिये अपराधी लाखों मसक्कत करता है अपना अपराध छुपाने की। न जेल की रोटी किसी को पसंद है न वो कैद ज़िंदगी। और किसी भी कैदी के लिये यह कोई चमत्कार से कम नहीं जब उसे कुछ दिन के लिये ही सही लेकिन बाहर की दुनिया को देखने का मौका मिले। लेकिन अगर ऐसे किसी मौके को कोई कैदी ठुकरा दे तो आश्चर्य होना तो वाज़िब है ही।

ऐसा ही एक शख्स है जो मेरठ के चौधरी चरन सिंह जिला कारगार में बंद है। कैदी का नाम आशिष है जिस पर 2016 में दहेज हत्या का आरोप था जो ट्रायल के दौरान खारिज़ हुआ, लेकिन आत्महत्या को उकसाने के आरोप में उसे छह साल की सजा सुनाई गई। आशिष ने अपने पाँच साल जेल में पुरे कर लिये हैं।

बता दें कि जेल में कैदियों की भीड़ देखते हुये शासन ने सजायाफ्ता कैदियों को विशेष पैरोल देने की व्यवस्था की थी। इसके साथ विचाराधिन बंदियों को दो माह की अग्रिम जमानत देने की भी स्विकृति दी थी। जिसमें आशिष की विशष पैरोल पर जमानत होनी थी। लेकिन आशिष ने रिहा होने से इंकार कर दिया। कैदी के मुताबिक बाहर कोरोना का कहर चरम पर है, और अगर वह जेल से निकलता है तो वह भी कोरोना के चपेट में आ जायेगा। उसे कोरोना का इतना खौफ है कि उसने विशेष पैरोल पर रिहा होने की पेशकश ठुकरा दी और रिहा होने से इनकार कर दिया।

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