बीमारी में मरीज़ को दवा खाने की सलाह सभी डॉक्टर देते हैं अब इसी बात का फ़ायदा उठाकर दवा कंपनियां अपना पेट भर रही हैं। कोरोना के इलाज-बचाव में प्रयोग में आ रहीं आईवरमैक्टिन-एजिथ्रोमाइसिन सहित कई दवाओं के दाम राज्यभर में बढ़ गए हैं। दवा कंपनियों इनके लिए अलग-अलग कीमत वसूल रही हैं। Corona से बचाव के लिए बड़ी संख्या में लोग आईवरमैक्टिन टैबलेट खा रहे हैं। इलाज के दौरान भी यह दवा प्रयोग की जा रही है। दवा की भारी मांग का फायदा उठाते हुए कई कंपनियों ने इसके रेट बढ़ा दिए हैं। कुछ माह पूर्व इसके एक पत्ते की कीमत 195 रुपये थी जो अब बढ़कर 350 रुपये हो गई है।

एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन के रेट में भी इजाफा हुआ है। इस दवा का 10 गोली का पत्ता 65 रुपये का था जो अब 90 रुपये में मिल रहा है। Corona के उपचार में काम आ रहीं विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स व अन्य मल्टीविटामिन के दामों में भी भारी इजाफा हुआ है। एक मेडिकल स्टोर चलाने वाले युवक ने बताया कि Corona में प्रयोग हो रही अधिकांश दवाएं डीपीसीओ के तहत नहीं आतीं इसलिए कीमतों में इजाफा हुआ है। कुछ कंपनियां पहले अपनी दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए तय दर से कम पर बेच रहीं थी। इस बीच डिमांड बढ़ी तो उन्होंने डीपीसीओ द्वारा तय दरों को ही एमआरपी कर लिया। उन्होंने कहा, जरूरी दवाओं के दाम कंपनियां खुद नहीं बढ़ा सकतीं। कोई नया फार्मूला हो तो उसकी कीमतों में ही कुछ बदलाव किया जा सकता है।

दवा की दुकानों पर काम करने वाले फार्मासिस्टों ने बताया कि कंपनियां नए बैच नंबर के साथ कीमत बढ़ाने का खेल कर रही हैं। बाजार में दवाओं की मांग बढ़ते ही नया बैच जारी कर दिया जाता है। छोटी कंपनियां कम उत्पादन दिखाकर लगातार बैच नंबर बदलती रहती हैं। इसके साथ ही दवा का मूल्य भी बढ़ा देती हैं। हर बैच नंबर के साथ दो से पांच रुपये तक की वृद्धि कर दी जाती है जो 6 माह में दस से तीस प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

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