DRDO की एंटी कोविड संजीवनी दवा आज से मरीजों बक लिए उपलब्ध होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 हर्षवर्धन ने 2DG के पहले बैच को दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लांच किया। जानकारी के मुताबिक,DRDO की हैदराबाद स्थित इंडस्ट्री-पार्टनर, डॉक्टर रेड्डीज़ लैब ने पहले बैच में कुल 10 हजार डोज तैयार की है।इसके बाद जून के महीने से हर हफ्ते एक लाख सैशे तैयार किये जायेंगे। पानी में घोलकर पीने वाली ये दवा जल्द दूसरे अस्पतालों में भी उपलब्ध हो सकती है। फिलहाल ये दवा अस्पतालों में ही मिलेगी, मेडिकल स्टोर पर पर उपलब्ध नही होगी।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार 2DG दवा गग्लूकोज पर आधारित है, इससे कोरोना मरीजों की ऑक्सजीन पर निर्भरता कम कर देती है,और मरीज़ को कोविड से जल्द स्वस्थ होने में मदद करती है। DRDO ने 2DG को डॉ0 रेड्डी लैब के साथ मिलकर तैयार किया है। जानकारी के मुताबिक क्लीनिक्ल-ट्रायल के दौरान ये पाया गया कि जिन कोविड-मरीजों को ये दवाई दी गई थी, उनकी RT-PCR रिपोर्ट जल्दी नेगिटेव आई है। DRDO की इस दवाई को लेकर खुद रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर से जानकारी देते हुए बताया था कि ये एक जैनेरिक मॉलिक्यूल है और ग्लूकोज का एक एनॉलोग है, इसलिए ये भरपूर मात्रा में मार्केट में उपलब्ध है। ये एक सैशे में पाउडर फॉर्म में मिलती है और पानी में घोलकर पी जा सकती है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल ही DRDO को कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार रहने का आदेश दिया था। इसके बाद DRDO ने खुद इस 2DG दवाई का थेरेपियेटिक इस्तेमाल किया और लैब में इस पर परीक्षण किया। ये परीक्षण हैदाराबाद की सेंटर फॉर सेलेल्यूर एंड मोलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के साथ किए गए थे, और इसमें पाया गया कि सारस-कोविड-2 वायरस के खिलाफ ये सही काम करता है और वायरल-ग्रोथ को रोकने में कामयाब है. इन परिणामों के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इस दवाई के फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत दी। डीआरडीओ ने इसके बाद हैदराबाद की अपनी इंडस्ट्री-पार्टनर, डाक्टर रेड्डी लैब के साथ 2020 में ही मई से लेकर अक्टूबर तक दूसरे फेज के क्लीनिकल ट्रायल किए। छह बड़े अस्पतालों में फेज 2A के परीक्षण किए गए व फेज-2B के परीक्षण 110 मरीजों पर किए गए।

DRDO के अनुसार फेज-2 में जिन कोविड मरीज़ों के इलाज दूसरी दवाइयों से हो रहे रहे थे उनसे 2DG दवाई वाले मरीज 2-3 दिन पहले सही हो रहे थे। इन परीणामों के आधार पर DRDO को फेज-3 के आखिरी चरण क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत दी गई,जो दिसम्बर 2020-मार्च 2021 तक चले। फेज-3 के ट्रायल कुल 220 मरीजों पर किए गए। ये परीक्षण दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजराज, राजस्थान, आंध्रा-प्रदेश, तेलंगाना, कनार्टक और तमिलनाडु के कुल 27 अस्पतालों में किए गए. जहाँ परिणाम ये आया कि 2DG वाले मरीजों को ऑक्सीजन कम देनी पड़ रह थी। तीसरे दिन से ही मरीजों में इस दवाई का असर दिखाई देने लगा था. जबकि इसी दौरान जो दूसरी दवाईयां कोविड मरीजों को दी जा रही थी उन्हें आर्टिफिशियल-ऑक्सीजन देने की जरूरत पड रही थी। सारे परीक्षणो के नतीजों के बाद 1 मई को डीसीजीआई ने 2DG दवाई को कोरोना के मरीजों पर इस्तेमाल की परमिशन दे दी।

इस 2DG दवा की विशेषता ये है कि ये दवाई कोविड से ग्रस्त मरीज के शरीर में वायरस के साथ घुल जाती है. इसके चलते वायरस की ग्रोथ नहीं हो पाती इसके वायरस के साथ मिल जाना ही इस दवाई को दूसरी दवाइयों से अलग करता है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब मरीजों को ऑक्सीजन की बेहद जरूरत है, ऐसे में इस दवाई से ऑक्सीजन पर निर्भरता बेहद कम हो जाएगी,और ये दवा कोविड से लड़ाई में रामबाण दवा साबित होगी, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।।
अनूप शुक्ला
ब्यूरो चीफ (यूपी)

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