Corona virus के ख़तरे को हम सभी ने देखा है और उससे होने वाली तबाही भी किसी से छुपी नहीं है। Corona virus के एक वेरिएंट को तीन हफ्ते पहले हम ‘इंडियन’ वेरिएंट कह रहे थे। फिर नया नाम आया ‘Delta’ और अब एक डरावना नाम ‘Delta Plus’ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत की दूसरी बड़ी Covid लहर का कारण बने Delta वेरिएंट में एक और म्युटेशन हुआ है जो वैक्सीन और कोविड इम्युनिटी को चकमा देने में इसकी मदद कर सकता है। डरावने म्यूटेशन हमेशा अधिक चिंताजनक वायरस में तब्दील नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पाया गया वेरिएंट ‘बीटा’, ये सभी टीकों की प्रभावकारिता को कम करता है लेकिन अल्फा (‘यूके वेरिएंट’) की तरह दुनिया में नहीं फैल पाया।

दरअसल B.1.617.1 वेरिएंट में पहले से ही वैक्सीन से बचने के लिए ‘484Q’ म्यूटेशन है, फिर भी Delta (B.1.617.2) इसके बिना एक बेहतर स्प्रेडर बन गया है। Delta भारत का प्रमुख स्ट्रेन है। ब्रिटेन में 91% नए मामले इसके कारण आ रह हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि अमेरिका में हर दो हफ्ते में इसके मामले दोगुने हो रहे हैं और यह पूरी दुनिया में दस्तक देने जा रहा है। बता दें कि Delta अब तक का सबसे बेस्ट स्प्रेडर है। अल्फा भी एक सुपर-स्प्रेडर था, लेकिन Delta इससे 60% अधिक ट्रांसमिसिबल हो सकता है। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के अनुसार, घरों के भीतर Delta अल्फा की तुलना में कम से कम 60% अधिक ट्रांसमिसिबल है।

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