रघुराम राजन ने कहा कि आलोचना के प्रति असहनीय रवैये के कारण सरकारें नीति बनाने में गलती करती हैं।

सरकार की एक आदत को मंदी के लिए जिम्मेदार ठहराया आरबीआई के पूर्व गवर्नर राघुराम राजन ने। जहां केंद्र सरकार लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के लिए पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है तो अब वहीं सरकार की एक आदत पर पूर्व गवर्नर ने भी हमला बोला है। हालाकि राघुराम राजन ने सिर्फ बीजेपी नहीं बल्कि सभी सरकारों की इस आदत को मंदी के लिए जिम्मेदार ठहराया।

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Image result for rbi raghuram rajanरघुराम राजन ने कहा कि आलोचना के प्रति असहनीय रवैये के कारण सरकारें नीति बनाने में गलती करती हैं।  बड़ी संख्या में लोग आलोचना करना बंद कर देंगे यदि आलोचना करने वाला हर व्यक्ति सरकार की ओर से किसी को चुप रहने के लिए कहेगा या ट्रोल सेना उस व्यक्ति के पीछे पड़ जाएगी। इसके बाद, सरकार खुश हो सकती है कि सब कुछ अच्छा है जब तक कि इसके बुरे परिणाम घोषित नहीं किए जाते। राजन ने कहा कि सच्चाई को लंबे समय तक नकारा नहीं जा सकता।

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आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने साथ ही कहा कि ऐतिहासिक उपलब्धियों में खो जाना, विदेशी विचारों का विरोध करना और विदेशियों के बारे में असुरक्षित महसूस करना आर्थिक विकास को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है। राघुराम राजन ने प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद द्वारा सरकार की नीतियों पर चिंता व्यक्त करने वाले दो सदस्यों को हटाने की आलोचना की है। राजन एक ब्लॉग में लिखा कि सार्वजनिक आलोचना नौकरशाहों को सरकार के प्रति वफादार रखती है। उन्होंने कहा कि इतिहास को समझना और जानना निश्चित रूप से एक अच्छी बात है, लेकिन इसमें पुरानी बात हमारी असुरक्षा को दर्शाती है, जो हमारी मौजूदा क्षमता को बढ़ाने में मदद नहीं करेगी।

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राजन ने पहले कहा था कि आर्थिक मंदी चिंता का विषय है। सरकार को इससे निपटने के लिए तत्काल ऊर्जा और एनबीएफसी क्षेत्र के मुद्दों को संबोधित करना चाहिए। साथ ही, निजी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए नए सुधार किए जाने चाहिए।