नवीन पाण्डेय

हैरान हूं, व्यथित हूं… कोरोना नाम की इस महामारी ने न केवल सिस्टम के सारे कलपुर्जे ढीले कर दिए, बल्कि सामाजिक तानेबाने और मानवता को बेहद शर्मनाक हालत में पहुंचा दिया है। कानपुर में बेटे के घर के बाहर सड़क पर पड़ी कोरोना पीड़ित मां की तस्वीरों ने हर संवेदनशील इंसान को झकझोर दिया होगा। ये कैसा समाज बना दिया है हमने.. अपनी ही मां को बेटे ने केवल इसलिए घर के बाहर फेंक दिया, क्योंकि उसे कोरोना हो गया था।

कानपुर के चकेरी थाना इलाके का मोहल्ला है ताड़ बगिया। चकेरी एयरपोर्ट के ठीक पीछे पड़ने वाले इस इलाके में सेना से रिटायर होने वाले ज़्यादातर लोगों ने अपने आशियाने बनाए हैं। 90 के दशक में जब शहर की बसावट फैली तो पास के गांववालों से सस्ती ज़मीने लेकर लोगों ने यहां अपने घर बनाए। ठीक ठाक खाते पीते और शिक्षित लोगों के इस मोहल्ले में लेफ्टिनेंट कर्नल श्याम यादव ने भी घर बनाया। सेना से रिटायर हुए पूर्व फौजियों के परिवार को सरकार जीवन भर के लिए मुफ्त इलाज़ देती है। किसी भी प्राइवेट अस्पताल में पेंशनर्स कार्ड के सहारे मुफ्त का इलाज़ आसानी से मिल जाता है।

कुछ साल पहले स्वर्ग सिधार चुके लेफ्टिनेंट कर्नल श्याम यादव ने शायद जीते जी कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी पत्नी लक्ष्मी को बीमारी के बाद सड़क पर फेंक दिया जाएगा। लेकिन कलयुगी बेटे को शायद अपनी बीवी बच्चों की चिन्ता ज़्यादा रही होगी, इसीलिए वो मां को अपनी बहन और जीजा जी के घर के बाहर छोड़ आया। बेटे का पक्ष तो सामने नहीं आया है, इसलिए यह भी हो सकता है कि इस दौर में वो मां के लिए किसी अस्पताल में एक बेड की व्यवस्था न कर पाया हो। अगर ऐसा है तो ये ‘वेंटिलेटर’ पर पड़े सिस्टम के मुंह पर भी एक करारा तमाचा है। कानपुर पुलिस के डीसीपी अनूप सिंह के मुताबिक बेटी के परिवार ने भी मां की मदद नहीं की और मां घर के बाहर बीमारी की हालत में तड़पती रही।

किसी ने बीमार मां का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया, तब पुलिस को पता लगा और तो उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां कोरोना पोजिटिव 50 साल की उन महिला ने कराहते हुए दम तोड़ दिया। आह… एक फौजी की अर्धांगिनी का कैसा दर्दनाक अंत। अब पुलिस कह रही है कि बेटे पर कार्रवाई करेगी। लेकिन इस घटना ने कोरोना को लेकर समाज में फैली दहशत और रिश्तों को भी तार तार कर दिया है। हे ईश्वर, ये कोरोना अभी और क्या क्या रंग दिखाएगा।

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