जिसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि इस बिल में संविधान का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

साठ साल पुराने नागरिकता कानून को बदलने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। आपको बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक  आज पेश किया है, जो कि अब लोकसभा में पास हो गया है।

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नागरिकता संशोधन बिल

बिल पेश होने के बाद जो वोटिंग हुई उसमें 293 वोट पक्ष में और 82 वोट विरोध में पड़े। इस बिल को 375 सांसदों ने वोट किया है। इस बिल के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत में आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को नागरिकता कानून के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी। अगर बात करें की इस बिल को लेकर कि लोकसभा में हुए हंगामें की तो गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि इस बिल की जरूरत कांग्रेस की वजह से पड़ी है धर्म के आधार पर कांग्रेस ने देश का विभाजन किया है अगर ये विभाजन ना किया जाता तो इस बिल की जरूरत नहीं पड़ती।

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नागरिकता संशोधन बिल

लोकसभा में बिल पेश हो ही विपक्ष ने जमकर हंगामा शुरू कर दिया। इस बिल का विरोध कतरे हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सेक्युलिरिज्म इस मुल्क का हिस्सा है, ये एक्ट फंडामेंटल राइट का उल्लंघन करता है। जिसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि इस बिल में संविधान का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बिल का कांग्रेस, टीएमसी समेत कई अहम विपक्षी पार्टियों ने विरोध किया है।

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