पिछले दिनों राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस अस्पताल की जांच की। जहां उन्होंने पाया की अस्पताल में किसी भी खिड़की में शिशा नहीं है,सारे दरवाजे टूटे हुए थे।

राजस्थान में कोटा का जेके लोन अस्पताल सवालों के घेरे में खड़ी है। इस अस्पताल में 105 से अधिक बच्चों की मौत हो गई है। बता दें की पिछले दिनों राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस अस्पताल की जांच की। जहां उन्होंने पाया की अस्पताल में किसी भी खिड़की में शिशा नहीं है,सारे दरवाजे टूटे हुए थे। बता दें की अस्पताल परिसर में सुअर के बच्चों कोभी घूमते हुए पाया। ऐसे मौसम में कई बच्चे पीड़ित पाए गए थे। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान के मुख्य सचिव को यह सुनिश्चित करने के लिए लिखा गया की 7 जनवरी तक मुख्य चिकित्साधिकारी को सभी दस्तावेजों को उपलब्ध कराना होगा।

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बता दें कि 29 दिसंबर को प्रियंक जो की राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण के प्रमुख है वो कानूनगो की टीम के साथ उन्होंने अस्पताल का दौरा किया था। दौरे के बाद उन्होंने बताया की अस्पताल की हालत बहुत की खराब है। अस्पताल में समान्य रखरखाव की चीजें भी मौजूद नहीं हैं। सफाई की व्यवस्था भी बहुत खराब है। इसके बाद उन्होंने कहा की अस्पताल में उपकरणों का कोई भी रिकॉर्ड नहीं है।

बता दें कि बच्चों के मौत के मामले में राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव वैभव गैलरिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिसका जवाब 3 दिन के अंदर मांगा गया था। लेकिन कानून ने बताया की अभी तक इसका कोई जवाब नहीं आया है। बता दें कि ये नोटिस 30 दिसंबर को जारी किया गया था, जिसका जवाब अभी तक नहीं आया।

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बता दें कि इस पूरे मामले के बाद शर्मा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा की ‘अस्पताल की तरफ से बेहतर सुविधाओं के लिए बार-बार फंड मांगा गया। पर, पूर्व की बीजेपी सरकार ने इसकी अनदेखी की। हम अब अस्पताल की सुविधा बेहतर करने में जुटे हुए हैं।’