ChhathPuja : नहाय खाय के साथ आज से छठ पर्व की शुरुआत

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नई दिल्ली: बुधवार 18 नवंबर तिथि चतुर्थी को छठ का पर्व नहाए खाए से शुरु हो चुका है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा त्योहार छठ पूजा 20 नवंबर को है। इसके उत्सव की शुरुआत आज से हो रही है। इसमें छठ मैया का पूजन और सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पूजा के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रती कहा जाता है। छठ के दौरान लोग 4 दिन तक व्रत रखते हैं।  छठ हिन्दू आस्था का एक ऐसा पर्व है जिसमें मूर्ति पूजा शामिल नहीं है। इस पूजा में छठी मईया के लिए व्रत किया जाता है। यह व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इसलिए छठ पूजा के दौरान कई बातों का ध्यान रखा जाता है।

छठी मईया का प्रसाद बनाते समय पूरी पवित्रता का ध्यान रखें। हाथ पैर धोकर प्रसाद तैयार करें। इस दौरान कभी भी मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए।छठ पूजा में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को तैयार करने वाले को तब तक कुछ नहीं खाना चाहिए जब तक की प्रसाद तैयार न हो जाए।छठी माई के प्रसाद को पैर नहीं लगाना चाहिए और सूर्य को अर्घ्य देते समय चांदी, स्टील, शीशा व प्लास्टिक के बने बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

छठ का पहला दिन नहाई खाई पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर या गंगाजल (पवित्र जल) छिड़ककर और सूर्य भगवान की पूजा करके शुरू किया जाता है जिसके बाद चना दाल के साथ कद्दू-भात (कद्दू की सब्जी और चावल) तैयार करके खाया जाता है।

पहले दिन सुबह व्रत रखने के बाद भक्त अगले दिन शाम को जिसे खरना कहा जाता है तक भोजन करते हैं, जहां वे खीर, चपातियां और फल खाते हैं। दूसरे दिन को लोहंड कहा जाता है।तीसरे दिन को पहला अर्घ या सांध्य अर्घ कहा जाता है। व्रत रखने वाले लोग इस दिन कुछ भी खाने से पूरी तरह परहेज करते हैं। डूबते सूरज की पूजा की जाती है और शाम को अर्घ दिया जाता है।अंतिम दिन – दूसरा अर्घ या सूर्योदय अर्घ – इस दिन सुबह सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ देते पूजा करते है और अपना व्रत खोलते हैं और इसके बाद भक्त खीर, मिठाई, ठेकुआ और फल सहित छठ प्रसाद का सेवन करते हैं।