यूपी में पंचायत चुनाव करीब 4 महीने की देरी से हो रहे हैं और इस देरी की वजह है कोरोना महामारी, पिछले साल कोरोना का साया कुछ इस कद्र छाया रहा कि पूरा साल ही इसकी जद में गुजर गया, अब भारत ने वैक्सीन जरुर बना ली है, बीच में कोरोना के मामलों में कमी भी दिखी लेकिन अब एक बार फिर कोरोना तेजी से पैर पसारने लगा है..लिहाजा कोरोना के साये में पंचायत चुनाव करवाना बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाला..चुनावआयोग भी इस बात को बखूबी जानता है लिहाजा राज्य में पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान बाद में हुआ था और पंचायत चुनाव को लेकर कोरोना गाइडलाइंस पहले ही जारी कर दी थी

पंचायत चुनाव को लेकर चुनाव आयोग की गाइडलाइंस

जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी या उनके द्वारा नामित स्वास्थ्य अधिकारी की नोडल अधिकारी के तौर पर हो नियुक्ति

कोरोना से बचाव के जरुरी उपाय सुनिश्चित करेगा नोडल अधिकारी

ट्रेनिंग में आने वालों की हो थर्मल स्कैनिंग

नामांकन के दौरान दफ्तर में हो साबुन पानी और सैनिटाइजर की व्यवस्था

बगैर मास्क रिटर्निंग ऑफिसर के रुम में नहीं मिलेगी एंट्री

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूरी

जनसभा के लिए केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइंस का पालन जरूरी

गाइडलाइंस का पालन ना करने पर होगी कार्रवाई

मतदान के दिन बूथ पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूरी

बिना मास्क के पोलिंग बूथ पर जाने की नहीं मिलेगी अनुमति

मतदाता पर शक हुआ तो मास्क हटाकर जांच करने के लिए चुनाव कर्मी रहेंगे स्वतंत्र

पोलिंग बूथ पर  सैनिटाइजर और थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था

मतदान केंद्र में दाखिल होने से पहले सैनिटाइजर का इस्तेमाल जरूरी

चुनाव कर्मी करेंगे मतदाताओं की थर्मल स्क्रीन

यूपी पंचायत चुनाव: पहले चरण के लिए आज और कल होगा नामांकन

कोरोना है लिहाजा तैयारियां तो खूब नजर आ रही हैं..लेकिन इन तैयारियों को अमलीजामा पहनाने की जितनी जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों या चुनावकर्मियों की है उससे भी ज्यादा जिम्मेदारी जनता की है..क्योंकि अगर जनता कोरोना गाइडलाइंस का पालन करेगी तो कोरोना के संक्रमण पर रोक लगेगी..उम्मीद तो यही करेंगे की जनता पंचायत चुनाव के दौरान मतदान के साथ साथ कोरोना महामारी के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझेगी

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