19 सितंबर 2008 को देश में सबसे चर्चित बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ था। जिसमें देश कि रक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस के जंबाज इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा ने अपनी जान गवाई थी।

आज से ठीक 11 साल पहले यानि कि 19 सितंबर 2008 को देश में सबसे चर्चित बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ था। जिसमें देश कि रक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस के जंबाज इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा ने अपनी जान गवाई थी। तारीख बदली साल बदले पर बाटला हाउस एनकाउंटर आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। तो चालिए आज हम आपको बाटला हाउस एनकाउंटर से जुडी अबतक की सारी धटनाओं के बार में आपको विस्तार से बताते है।

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बाटला हाउस एनकाउंटर क्यों था इतना खास? जानिए इसकी कुछ अहम बातें

13 सितंबर 2008 को वो भयानक दिन जिससे पूरी दिल्ली दहल उठी थी। दिल्ली के कनॉट प्लेस, ग्रेटर कैलाश और करोल बाग में सीरियल बाल्सट हुए थे। इस सीरियल ब्लास्ट में 30 निर्दोष लोग मारे गए थे और लगभग 130 लोग धायल हुए थे। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल को सौंप दी गई थी।

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फिर आया 19 सितंबर, 2008 का दिन

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उन सीरियल बम धमाकों की जांच ही कर रही थी कि तभी 19 सितंबर 2008 पुलिस को दिल्ली के बाटला हाउस में एल-18 नंबर की इमारत की तीसरी मंजिल पर कुछ संदिग्ध होने की सूचना मिली। जिसके बाद पुलिस की इंडियन मुजाहीदीन के संदिग्ध आतंकियों से मुठभेड़ भी हुई थी। इस मुठभेड़ में दो संदिग्धों की मौत हो गई थी। मरने वालों की पहचान मोहम्मद आतिफ अमीन और साजिद के रूप में हुई थी। आपको बता दें कि दोनों ही यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले थे। हालांकि मौके से दो युवकों को गिरफ्तार किया गया था पर एक युवक मौके से किसी तरह से भाग निकला था।

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तो वहीँ इस एनकाउंटर में टीम का नेतृत्व कर रहे मोहन चंद्र शर्मा को भी गोली लग गई थी। 19 सितंबर को ही देर शाम मोहन चंद्र शर्मा को होली फैमिली अस्पताल में भर्ती करया गया, जंहा उनकी मौत हो गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनको तीन गोलियां लगी थी। एक पेट में एक जांघ में और एक दाहिने हाथ में। पुलिस ने मोहन चंद्र शर्मा की मौत के लिए शहजाद अहमद को जिम्मेदार ठहराया था। कुछ दिनों बाद फिर इस एनकांउटर पर सवाल उठने शुरु हो गए। कोई इसको सही बोलता था तो कोई इस एनकांउटर को फैक कहता था। इस मुदें पर सिरायसी और विवादित बयान आने शुरु हो गए थे।

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तो चलिए आपको बताते है कि आखिर कब क्या हुआ?

तारीख 21 सितंबर, 2008

पुलिस ने 21 सितंबर तक इस मामले में कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एल-18 मकान की देखभाल करने वाला भी शामिल था।

22 जुलाई, 2009
जांच के बाद एनएचआरसी ने बाटला हाउस एनकाउंटर पर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर दी थी और दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दी थी।

26 अगस्त, 2009

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बाटला हाउस एनकाउंटर की न्यायिक जांच से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने आयोग की रिपोर्ट को ही सही माना था।

30 अक्टूबर, 2009

कुछ लोगों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी सारे पहलुओं को जानने के बाद न्यायिक जांच से मना कर दिया था।

बाटला हाउस एनकाउंटर क्यों था इतना खास? जानिए इसकी कुछ अहम बातें

6 फरवरी, 2010

बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद से ही पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के कातिल को तलाश कर रही थी। आखिरकार 6 फरवरी 2010 को लंबी भागदौड़ के दिल्ली पुलिस ने मोहन चंद्र शर्मा के हत्यारे शहजाद को गिरफ्तार कर लिया था।

20 जुलाई, 2013

इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के कातिल शहजाद अहमद के मामले में कोर्ट ने 20 जुलाई 2013 को सुनवाई पूरी कर ली। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया था।

25 जुलाई, 2013

फैसला सुरक्षित रखने के पांच दिनों के बाद अदालत ने इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा की हत्या के मामले में शहजाद अहमद को दोषी करार क्रर दिया था।

30 जुलाई, 2013

अदालत ने शहजाद अहमद को इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के कत्ल के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

साल बदले सियासी बयान आये नेताओं ने इस बाटला हाउस एनकाउंटर को लेकर आपनी तरह तरह की पक्ष रखे किसी ने कहा ये एनकाउंटर ही फेक है तो वही किसी ने इस एनकाउंटर को लेकर अपनी संवेदना जताई। पर यह देश का मुद्दा है जिसमें सियासत की बजाय सबको एक होकर उस शहीद को नमन करना चाहिए ।