सैन्यकर्मियों के लिए ड्यूटी के दौरान किसी कार्रवाई के लिए नकद पुरस्कार की नहीं है व्यवस्था

दावों और हक़ीक़त में कितना फ़र्क़ होता है ये वही जानता है जिसको सच्चाई पता होती है। सेना ने 11 जनवरी को इस बात से इनकार किया कि अम्शीपुरा में एक कथित Fake encounter में अनुशासनात्मक कार्यवाही का सामना कर रहे उसके कैप्टन ने 20 लाख रुपए के पुरस्कार के लिए Terrorists को मारा।

Army ने मामले में Jammu and Kashmir Police की तरफ से दायर charge sheet का एक तरह से प्रतिवाद किया है। Srinagar में रक्षा प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने एक Brief statement जारी कर कहा कि सैन्यकर्मियों के लिए युद्ध के हालात या ड्यूटी के दौरान किसी तरह की कार्रवाई के लिए नकद पुरस्कार की व्यवस्था नहीं है।

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राजेश ने कहा, Media में इस तरह की खबरें हैं कि अम्शीपुरा मुठभेड़ में 20 लाख रुपए के पुरस्कार के लिए Terrorists को मारा गया। यह स्पष्ट किया जाता है कि Indian Army में इसके कर्मियों के लिए युद्ध के हालात या ड्यूटी के दौरान किसी तरह की कार्रवाई के लिए नकद पुरस्कार की कोई व्यवस्था नहीं है। बयान में कहा गया कि खबर Indian Army की प्रक्रियाओं के तथ्यों पर आधारित नहीं है। 3 युवकों को पिछले साल July में Terrorist बताकर एक कथित Fake encounter में मार गिराया गया था।

घटना की जांच के लिए Jammu and Kashmir Police की तरफ से गठित Special investigation team ने अपने charge sheet में कहा कि फर्जी मुठभेड़ के माध्यम से आरोपी कैप्टन भूपिंदर सिंह और 2 अन्य नागरिकों तबश नाजीर और बिलाल अहमद लोन ने वास्तविक अपराध के साक्ष्यों को जानबूझकर नष्ट किया। इसके अलावा Criminal conspiracy के तहत जानबूझकर गलत सूचना फैलाई ताकि 20 लाख रुपये की prize money को हड़प सकें। सेना ने मामले में Court of inquiry के आदेश दिए थे। पुलिस ने 26 दिसंबर 2020 को शोपियां के Chief Judicial Magistrate के समक्ष charge sheet दायर किया था।

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