चीन की आक्रमकता से निपटने के लिए अमेरिका को चाहिये इस देश का साथ

0
208
INDIA

नई दिल्ली : चीन की बढ़ती आक्रामकता से लगभग आधी दुनिया परेशान है। इसे देखते हुए यह अहम है कि एक जैसे विचारों वाले देश, जैसे भारत के साथ मिलकर काम किया जाए। यह कहना है अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने वाशिंगटन डीसी में फॉरेन प्रेस सेंटर द्वारा आयोजित ‘कांफ्रेंस कॉल’ के दौरान संवाददाताओं से कहा, “हिमालय से लेकर दक्षिण चीन सागर तक हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते आक्रामक व्यवहार के कारण हमारे लिए समान सोच रखने वाले भारत जैसे साझेदारों के साथ मिलकर काम करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। “

उन्होंने कहा कि ‘अमेरिका अंतरराष्ट्रीय विकास वित्त सहयोग’ (यूआईडीएफसी) ने भारत में निवेश परियोजनाओं में 50 करोड़ डॉलर की सहायता मुहैया कराने की प्रतिबद्धता जताई है और हाल में मुंबई में एक प्रबंध निदेशक को नियुक्त किया है, जो भारत और क्षेत्र में निवेश को विस्तार देने में मदद करेगा।

अधिकारी ने बताया कि कोविड-19 का टीका विकसित करने के संयुक्त प्रयास उल्लेखनीय प्रगति के साथ जारी है. उन्होंने बताया कि छह से अधिक अमेरिकी कंपनियां और संस्थान ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ जैसे भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर टीका खोजने का प्रयास कर रहे हैं।

भारत अमेरिका के साथ एक ऐसा सैन्य समझौता करने जा रहा है, जिसके तहत उसे यूएस के सैटेलाइट डेटा का एक्सेस मिल जाएगा। सैटलाइट डेटा की मदद से मिसाइलें और ड्रोन और सटीक हमले कर सकेंगे। दरअसल, भारत इस मामले में चीनी सेना की बढ़त को पाटना चाहता है। एलएसी पर चीन के साथ जबरदस्त तनाव के बीच यह भावी समझौता और ज्यादा अहम हो गया है। उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ्ते होने वाली इस बैठक में इस समझौते का ऐलान किया जाएगा।

बता दें अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है और चुनाव से पहले भारत और अमेरिका के बीच ट्रंप सरकार की आखिरी सबसे बड़ी राजनयिक वार्ता होगी. इस दो दिवसीय वार्ता में भारत और अमेरिका के टॉप-चार कैबिनेट मंत्री भाग लेंगे. इस बैठक में दोनों देशों के संबंधों की आगामी चार साल के लिए आधारशिला रखे जाने की संभावना है, भले ही चुनाव कोई भी जीते।