भारत से ब्रिटेन पहुंची शल्य चिकित्सा पद्यति

भारतीय चिकित्सा प्रणाली में आयुर्वेद को सबसे अहम माना जाता है । लेकिन शायद ही कम लोगों को पता है कि शल्य चिकित्सा की शुरुआत भी भारत से ही हुई है । भारत के पहले शल्य चिकित्सक के तौर पर चाण्डक्य को इसका श्रेय जाता है । मौर्य काल के जाने वाले अर्थशास्त्री के तथ्यो को आज भी सबसे अहम नीतिकारों के तौर पर माना जाता है । मौर्य काल में चन्द्रगुप्त मौर्य का शासन मौजूदा अफगानिस्तान के कंधार से इरान के तिरकित तक माना जाता है ।वही भारत में दक्षिण तक उसका राज था इतने बड़े इलाके को जितने के लिए चन्द्रगुप्त मौर्य को कई युद्ध लड़ने पड़े. युद्धो के दौरान आम तौर पर सैनिकों की नाक कट जाया करती थी। आचार्य चाणक्य ने ही माथे पर नाक के आकार का निशान बना कर उसे नाक की जगह बांस की दो नलकियों के सहारे चिंटियों की मदद से शल्य चिकित्सा के जरीए नाक की जगह दुसरी नाम बना दिया करते थे । अंग्रेजों ने युद्धों में भारतीय चिकित्सकों को ऐसा करते पाया जिसके बाद यह पद्यति ब्रिटेन पहुंच कर और उन्नत हो गई। आज इंसान के शरीर के हिस्सों को दुसरे इंसान के हिस्सों से बदल कर नया जीवन दिया जा रहा है तो इसका श्रेय आचार्य चाणक्य को ही जाता है ।

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