दिल्ली में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इंडिया गेट पर तो भोपाल में 69 फीट लंबा केक काट कर कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी का जन्मदिन मनाया। Image result for pm modi birthday

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अपना 69वां जन्मदिन बना रहे हैं. पीएम मोदी के जन्मदिन का जश्न पूरे देश में मनाया जा रहा है. दिल्ली में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इंडिया गेट पर तो भोपाल में 69 फीट लंबा केक काट कर कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी का जन्मदिन मनाया।

एक चायवाला का कद कब भारत की राजनीति में इतना बढ़ गया कि वह सीधा देश की राजनीति के शिखर पर पहुंच गया इस सवाल का जवाब आज पूरा विपक्ष तलाश रहा है. विपक्ष लगातार कोशिश कर रहा है कि मोदी को घेरा जा सके. लेकिन हर कोशिश नाकाम हो रही है. हर चक्रव्यूह को पीएम मोदी भेदते जा रहे हैं।

पीएम मोदी को घेरने की विपक्ष की कोशिशें नाकाम हो रही हैं. पीएम मोदी की ताकत को खत्म करने के लिए हर गणित फेल हो रहा है और इसी साथ बिखरता जा रहा है विपक्ष और क्षीण होती जा रही है विपक्ष की ताकत।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब पीएम मोदी ने करिश्मा किया है

दो बार विरोधियों को धूल चटाने वाले पीएम मोदी ने गुजरात से दिल्ली की सियासत तक का सफर तय किया. दो बार अपने दम पर मोदी ने बीजेपी को बड़ी जीत दलाई. पार्टी नहीं बल्कि चेहरे को वोट दिए गए और उस चेहरे ने पार्टी को दिशा और दशा दोनों ही बदल दी. देश की सबसे ताकतवर राजनीतिक पार्टी के तौर पर बीजेपी को विश्वपटल पर पहचान दिलाई।

गुजरात के एक सामान्य परिवार में जन्में नरेंद्र मोदी साल 2001 में गुजरात के सीएम बनें. गुजरात के सीएम रहते हुए भी पूरे देश में चर्चा का केंद्र रहते थे मोदी. कभी गुजरात मॉडल पेश कर वाहवाही बटोरी तो कभी गोधरा कांड के चलते आलोचनाओं का शिकार भी हुए. दिल्ली की सत्ता अभी दूर थी. विरोधी लगातार बढ़ते जा रहे थे. विरोधी स्वर की बात करें तो मोदी के खिलाफ यह स्वर सिर्फ विरोधी खेमें से ही नहीं बल्कि पार्टी के अंदर भी सुनाई दिए. खुद अपनी ही पार्टी में मोदी को रुकावटों, असहमतियों और मतभेदों का सामना करना पड़ा है।

गोधरा कांड के बाद किसी ने सोचा भी नहीं था कि नरेंद्र मोदी देश की सत्ता संभालेंगे

गोधरा कांड के बाद किसी ने सोचा भी नहीं था कि नरेंद्र मोदी देश की सत्ता संभालेंगे, लेकिन गुजरात से निकलकर दिल्ली तक अपना रास्ता और अपनी ज़मीन मोदी ने खुद ही तैयार की है. पार्टी के कुछ चेहरे मोदी स्टाइल राजनीति के पक्षधर नहीं थे। लेकिन गुजरात में उनके कार्याकाल में किए गए विकास कार्यों का परिणाम ही रहा कि मोदी बीजेपी के पीएम चेहरा बनें। तमाम आलोचनाओं के बाद भी जनता का उन्हें बेहद प्यार मिला और मोदी काबिज हुए दिल्ली की सत्ता पर. 2014 में ऐतिहासिक जीत हासिल की. अपने सबसे विश्वासपात्र व्यक्ति को पार्टी सौंपी. सत्ता और पार्टी दोनों अपनी जेबों में आने के बाद बीजेपी मोदीमय हुई और आज जिस बीजेपी को अटल युग में पहचान मिली वो बीजेपी मोदी युग में आज पूरी तरह से समाहित हो चुकी है ताकतवर हो चुकी है।

सत्ता में काबिज होने के बाद मोदी ने अपनी विचारधारा में परिवर्तन किया. मोदी ने आज की सत्ता और बीजेपी को नए विचार के सांचे पर गढ़ा. इसमें स्वदेशी के प्रति हठधर्मिता नहीं है. पश्चिम के प्रति पूर्वाग्रह नहीं है, निजीकरण के खिलाफ दृढ़निश्चय नहीं है। बल्कि इस सारे ही मामलों में बीजेपी और मोदी सरकार अपनी 1990 के दशक की किताबों, पर्चों को खंडित करती नज़र आती है।