हर साल 15 August को ‘Patang’ उड़ाकर मनाया जाता है आज़ादी का जश्न

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हर साल 15 August को नीले नीले आसमान में रंग बिरंगी ‘Patang’ उड़ते हुए आपने ज़रूर देखीं होंगी। दरअसल पतंगबाजी ऐसा शौक है जिसके मज़े लूटने के लिए बड़े भी बच्चे बन जाते हैं। भारत के लगभग हर हिस्से में पतंगबाजी की जाती है। हाथ में मांझा लिए बच्चे घंटों तक आसमान में अपनी Patang से मज़े लूटते हैं। हालांकि Patang उड़ाने के लिए आपको किसी खास त्यौहार की जरूरत नहीं है लेकिन आजादी के दिन यानी 15 अगस्त को लोग खासतौर से Patang उड़ाना पसंद करते हैं।

Patang उड़ाने के लिए आपको किसी ट्रेनिंग की भी जरूरत नहीं है। बस Patang और मांझा लीजिए और हो जाइए शुरू…15 अगस्त के अलावा भारत में लोग मकर संक्रांति के दिन भी Patang उड़ाना पसंद करते हैं। भारत के लिए 15 अगस्त का दिन क्यों ख़ास है ये हमें बताने की ज़रूरत नहीं है। देश तिरंगे के रंग में रंगा होता है और हर- तरफ आज़ाद भारत का जश्न मन रहा होता है। इस जश्न के बीच कई लोग Patang भी उड़ाते हैं।

15 अगस्त को Patang उड़ाना एक परंपरा सी बन गई है। आसमान में उड़ती Patang स्वतंत्रता, आनंद और देशभक्ति का प्रतीक तो लेकर आती ही है। मगर ये उस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण घटना की तरफ भी इशारा करती है, जो स्वतंत्रता दिवस पर Patang उड़ाने की ख़ास वजह है। बता दें कि 1927 के दौरान अंग्रेज़ों का विरोध करने के लिए पतंगों का बहुत बढ़ चढ़कर इस्तेमाल किया गया था। दरअसल, 1927 के दौरान देश में Simon Commission को लेकर काफ़ी विरोध शुरू हो गया था।

ब्रिटिश सरकार ने 1919 के भारत सरकार अधिनियम की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया था। आयोग का उद्देश्य अधिनियम के काम-काज़ की जांच करना और प्रशासन की प्रणाली में और सुधारों का सुझाव देना था। इस आयोग का नेतृत्व सर जॉन साइमन कर रहे थे, इसलिए इसका नाम Simon Commission पड़ा। Commission का विरोध कर रहे लोग ‘Go Back Simon’ के नारे पतंगों पर लिख उसे उड़ाते थे। तभी से स्वतंत्रता दिवस पर Patang उड़ाना एक परम्परा बन गई।

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