इन हालातों में Punjab में कैसे झाड़ू चला पाएंगे Arvind Kejriwal 

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Delhi में CM Arvind Kejriwal के काम की तारीफ होती है लेकिन Punjab में उन्हें कितना पसंद किया जाता है ये बात साफ साफ कोई नहीं बता सकता। आम आदमी पार्टी के लिए दिल्ली के बाद Punjab ही वह राज्य रहा है, जहां विस्तार पर उसकी नजर रही है। 2017 के विधानसभा चुनाव में राज्य की कुल 117 सीटों में से 20 पर जीत हासिल करके आम आदमी पार्टी ने बड़ी सफलता भी हासिल की थी। लेकिन अब 5 साल बाद जब ‘आप’ को Punjab की उर्वर ज़मीन पर वोटों की फसल की उम्मीद है, तब उसे करारा झटका लग रहा है।

9 नवंबर को ही पार्टी की एक और विधायक रूपिंदर कौर रूबी ने पार्टी का दामन छोड़ दिया। इसके बाद बुधवार को ही उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। वह आप की चौथी विधायक हैं, जिन्होंने Punjab में कांग्रेस का दामन थाम लिया। इससे पहले जून में सुखपाल सिंह खैरा समेत तीन विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे। खैरा के अलावा भदौर के विधायक पीरमल सिंह और मौर के विधायक जगदेव सिंह खालसा भी कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इस तरह बीते 5 सालों में आम आदमी पार्टी के विधायकों में लगातार कमी देखने को मिल रही है।

यही नहीं पार्टी अंतर्कलह से भी जूझ रही है। इसी के चलते सुखपाल खैरा ने पार्टी छोड़ी थी और Arvind Kejriwal पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें तानाशाह करार दिया था। यही नहीं उन्होंने कहा था कि वह नकली क्रांतिकारी हैं और भाजपा-संघ की ही ‘बी टीम’ के तौर पर काम कर रहे हैं। एक तरफ आम आदमी पार्टी विधायकों और नेताओं के पलायन से जूझ रही है तो वहीं दूसरी ओर अंतर्कलह भी कम नहीं है। चुनाव सिर पर है और अब तक पार्टी की ओर से सीएम फेस का ऐलान नहीं किया गया है।

Arvind Kejriwal कई बार यह दोहरा चुके हैं कि वह सिख चेहरे और Punjab की शान बढ़ाने वाले नेता को ही सीएम प्रोजेक्ट करेंगे, लेकिन अब तक तस्वीर साफ नहीं है। यही नहीं पार्टी में पंजाब का बड़ा चेहरा रहे भगवंत मान की नाराजगी भी दिखी है, जो खुद को सीएम उम्मीदवारी का दावेदार मानते रहे हैं। यही नहीं सितंबर में उनके समर्थकों ने पार्टी के विधानसभा में नेता हरपाल सिंह चीमा के घर के बाहर प्रदर्शन किया था। उनकी मांग थी कि संगरूर के सांसद भगवंत मान को 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए सीएम का चेहरा घोषित किया जाना चाहिए।

Arvind Kejriwal बीते कई महीनों में लगातार Punjab आए हैं। फ्री बिजली, पानी जैसे कई ऐलान उन्होंने किए हैं, जिन पर उन्हें Delhi में कामयाबी भी मिली थी। लेकिन अब तक लीडरशिप के मामले में आम आदमी पार्टी ऊहापोह में ही नजर आई है।

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