यूपी में लगातार बढ़ते अपराध को देखते हुए योगी सरकार सख्त रवैया अपना रही है। सीएए के विरोध के चलते यूपी के कई हिस्सों में हिंसा के घटनाएं देखने को मिली थी। जिसके बाद कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे थे। जिसे देखते हुए योगी सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। यूपी में पहली बार पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने को लेकर योगी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

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अब यूपी में मजिस्ट्रेट वाले अधिकार पुलिस के पास होंगे। यूपी के दो शहरों में यह सिस्टम लागू होगा। जिनमें लखनऊ और नोएडा का नाम शामिल है। लखनऊ में सुजीत पांडेय की कमिश्नर पद पर तैनात किया गया है और नोएडा आलोक सिंह नोएडा के पहले पुलिस कमिश्नर बनाए गए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले 50 वर्ष से यूपी में ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ के लिए पुलिस आयुक्त प्रणाली की मांग की जा रही थी। जिसको अब यूपी के दो बड़े शहरों में लागू करने का फैसला लिया गया है।

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क्या होता है कमिश्नर सिस्टम?

अगर हम कमिश्नर सिस्टम को आसान भाषा में समझे तो भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के भाग 4 के अनुसार डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का पुलिस पर नियंत्रण का अधिकार होता है। वहीं अब योगी कैबिनेट में कमिश्नर सिस्टम को मंजूरी मिलने के बाद लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो जाने से यहां ये अधिकार पुलिस अफसरों को मिल जाएंगे। कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस के अधिकार बढ़ जाते हैं। पुलिस इस प्रणाली के लागू होने से हिंसा या फिर शांति भंग होने को लेकर रासुका, गैंगस्टर एक्ट और गुंडा एक्ट तक लगा सकेगी। पुलिस के पास आकस्मिक परिस्थितियों में फैसले लेने का अधिकार नहीं होता था। इसके लिए वो डीएम या मंडल कमिश्नर या फिर शासन के आदेश का इंतजार करते थे। लेकिन अब ऐसी परिस्थितियों में पुलिस को जिला अधिकारी और एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के ये अधिकार पुलिस अधिकारियों के पास होंगे।