तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाओं को समझते हुए भारत ने एग्रीमेंट पर साइन करने का फैसला लिया है।

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करतारपुर कॉरिडोर को लेकर भारत 23 अक्टूबर को एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने वाला है। भारत के कड़े विरोध के बावजूद कॉरिडोर के इस्तेमाल पर तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान को शुल्क की अदाईगी करनी होगी। तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाओं को समझते हुए भारत ने एग्रीमेंट पर साइन करने का फैसला लिया है।

बता दें कि प्रत्येक तीर्थयात्री से 20 अमरीकी डॉलर (1,421रुपए ) की फीस के कारण दोनों देशों के बीच करतारपुर कॉरिडोर के संचालन को लेकर मसला बना हुआ है। भारत-पाकिस्तान की इस शर्त का कड़ा विरोध कर रहा है। वहीं पाक फीस वसूलने पर अड़ा हुआ है।

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भारत-पाकिस्तान अधिकारियों के बीच करतारपुर कॉरिडोर को लेकर तीन बैठकें हो चुकी हैं। अंतिम बैठक में पाकिस्तान ने प्रति श्रद्धालु 20 डॉलर फीस की शर्त रखी थी। भारतीय अधिकारियों ने इस शर्त का तुरंत विरोध किया था। भारत का तर्क था कि करतारपुर कॉरिडोर सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी द्वारा स्थापित गुरुद्वारा हैं। जो श्री करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए बनाया गया है। विश्व के किसी भी देश में धार्मिक कॉरिडोर पर एंट्री फीस वसूलने की कोई चलन नहीं है लेकिन पाकिस्तान ने भारत के इस प्रस्ताव को मानने से साफ इंकार कर दिया था।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने सोमवार को करतारपुर सेवा शुल्क को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की हैं। उन्होनें कहा हैं कि करतारपुर गुरुद्वारा साहिब के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं 20 रुपये प्रति डॉलर शुल्क लगाना ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान ने आस्था के साथ कारोबार किया है।

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