9 अप्रैल 2021को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के साथ करीब 28 जिलों में लॉकडाउन लगाया गया था। इस दौरान खुली रहने वाली दुकानों का भी चालान काटा गया। वहीं, रायपुर से 60 किलोमीटर दूर सिमगा में तहसीलदार, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर और एसडीएम तीनों मिलकर अपनी ही सरकार चलाने में व्यस्त थे। तहसीलदार समेत कई कर्मचारियों ने मिलकर जीवनदीप समिति की रसीद छपाई और कोरोना काल में दुकानदारों के ऊपर ताबड़तोड़ कार्रवाई करने लगे।

जीवनदीप समिति की रसीद किसी भी हॉस्पिटल में अगर कोई व्यक्ति दान देना चाहता है तो इस रसीद का उपयोग किया जाता है लेकिन तहसीलदार समेत कई कर्मचारी मिलकर जीवनदीप समिति की रसीद के माध्यम से आपदा का लाभ उठाते हुए सारी रकम बंदरबांट करने पर तुले हुए थे। मामला संज्ञान में आया तो दुकानदारों का पैसा वापस करने के लिए तीनों अधिकारी तैयार हो गए। जो काम ड्रग इंस्पेक्टर का होता है वह काम तहसीलदार कर रहें थे।

वहीं, एक तहसीलदार मेडिकल स्टोर पर जाकर फूड सेफ्टी ऑफिसर के काम को अंजाम दे रहा था और बता रहा था कि, 12वीं की छात्रा के द्वारा दवाइयां दी जा रही थी इसीलिए उन्होंने उस मेडिकल स्टोर के मालिक से जुर्माना वसूला था।
साल 2020 के लॉकडाउन में भी इसी तरह से जीवनदीप समिति की रसीद के माध्यम से लाखों रुपयों का फर्जीवाड़ा किया गया था। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार की तरफ से अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।

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