सरकार चुनाव से पहले हर नागरिक की सुरक्षा का दावा करती है।

सरकार चाहे किसी की भी हो या राज्य कोई भी हो जुर्म अपने पांव हमेशा पसारे रहता है। आए दिन हत्या और बलात्कार की खबरें अखबारों में छपती है और न्यूज़ चैनल में देखी जा सकती है। सरकार चुनाव से पहले हर नागरिक की सुरक्षा का दावा करती है। लेकिन सरकार बनते ही सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े हो जाते है। जिसका जीता जागता उदाहरण हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या के रुप में देखने को मिला है। जिसके चलते यूपी से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है।

कमलेश तिवारी की हत्या के रुप में देखने को मिला है।आपको बता दें कि कमलेश तिवारी तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने हजरत मोहम्मद पर विवादित बयान दिया था। उन्हें एक कट्टर हिंदूवादी नेता के रूप में देखा जा रहा था और वे लगातार राजनीति में बड़े मुकाम पर पहुंचते जा रहे थे। उनके समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ती हुई दिखाई पड़ रही थी। हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने लखनऊ से अपनी पार्टी चलाने का फैसला लिया था। शुक्रवार को हुई उनकी हत्या को लेकर उनके समर्थक धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

कमलेश तिवारी की हत्या के रुप में देखने को मिला है।कमलेश तिवारी के हत्या के बाद उनके समर्थकों में उबाल देखा जा रहा है। उनके समर्थकों ने कई धरना प्रदर्शन भी किए और योगी सरकार के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के घर पर घेराव भी किया।यूपी सरकार पर उंगली उठने के बादइस मामले पर योगी सरकार ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। यूपी सरकार के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने मौन तोड़ते हुए कहा है कि जो भी हत्या के दोषी है, उनको जल्द से जल्द गिरफ्तार करके जेल में भेज दिया जाएगा और परिवार की सुरक्षा का हम पूरा प्रबंध कर रहे हैं।