1918 में स्पेनिश फ्लू पांडेमिक ने दुनिया की एक तिहाई आबादी को संक्रमित कर दिया था।

आज के दौर में स्वस्थ रहना सबसे मुश्किल काम हो गया है। दुनिया का हर तीसरा आदमी किसी ना किसी बीमारी से जूझ रहा है या किसी ना किसी बीमारी की दवाई खा रहा है। हर साल मौसम के बदलाव पर चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू कितने हजारों लोगों की जान ले लेते हैं। हर साल देश में कैंसर के मरीज भी बढ़ते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। लाखों लोग शुगर की चपेट में भी है।

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स्पेनिश फ्लू पांडेमिक ने दुनिया की एक तिहाई आबादी को संक्रमित कर दिया था।दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती और आने वाली है। यह चुनौती बाकी सब चुनौतियों से कहीं बड़ी होगी। क्योंकि, यह चुनौती हवा में फैलने वाला एक खतरनाक वायरस होगा। जो दस्तक देने के 36 घंटे के अंदर पूरी दुनिया में फैल जाएगा। इसकी वजह से पूरी दुनिया में आठ करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पूर्व प्रमुख ने इस अलर्ट को जारी किया है। उन्होंने इसे अब तक का सबसे खतरनाक और जानलेवा फ्लू यानी वायरस बताया है।

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स्पेनिश फ्लू पांडेमिक ने दुनिया की एक तिहाई आबादी को संक्रमित कर दिया था।विशेषज्ञों के अनुसार करीब एक सदी पहले 1918 में स्पेनिश फ्लू पांडेमिक ने दुनिया की एक तिहाई आबादी को संक्रमित कर दिया था। उस दौरान इस फ्लू की वजह से 5 करोड लोगों ने अपनी जान गवाई थी। जानकारी के लिए बता दें कि जो बीमारी अब दस्तक देने वाली है यह उस फ्लू से ज्यादा खतरनाक हैं। यह दस्तक देने के बाद 36 घंटे के अंदर पूरी दुनिया में फैल जाएगा और इसकी वजह से लगभग 80000000 लोगों के मौत हो सकती है।

स्पेनिश फ्लू पांडेमिक ने दुनिया की एक तिहाई आबादी को संक्रमित कर दिया था।