आज के बच्चे ही कल के भविष्य हैं, और इनका भविष्य तभी बेहतर होगा जब इन्हें बचपन से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।

एक स्वस्थ समाज की कल्पना करते ही हमारे ज़हन में सबसे पहले शिक्षा का ख्याल आता है। क्योंकि शिक्षा के बिना इंसान पशु के बराबर है। दरअसल शिक्षा ही वो कुंजी है जो किसी भी व्यक्ति को जीवन में आगे बढ़ाने और सफलता प्राप्त करने का रास्ता प्रदान करती है। व्यक्तित्व निर्माण के साथ ही देश के निर्माण और विकास में भी शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है।

आज के बच्चे ही कल के भविष्य हैं, और इनका भविष्य तभी बेहतर होगा जब इन्हें बचपन से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। यही वजह है कि सरकार पिछले कुछ सालों से शिक्षा को लेकर काफी सजग औऱ जागरूक है। पिछले कुछ सालों में सरकार के अथक प्रयासों के बूते देश में स्कूली शिक्षा के स्तर में काफी सुधार हुआ है। देश भर के स्कूलों में शिक्षा का स्तर और बेहतर करने के साथ ही विसंगतियों को दूर करने और बच्चों को दी जा रही शिक्षा का सही मूल्यांकन करने के लिए सरकार ने विशेषज्ञों की मदद से एक रिपोर्ट तैयार की है।

दरअसल नीति आयोग ने ‘स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स’ जारी की है, जिसके अनुसार स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में उत्तर प्रदेश का नाम सबसे नीचे है। कहने के लिए उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है पर उसका शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा प्रदर्शन अप्रत्याशित है।

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अगर पहले स्थान की बता करें तो केरल पहले नंबर पर है, राजस्थान दूसरे और कर्नाटक तीसरे स्थान पर है। झारखंड और बिहार के प्रदर्शन भी कुछ खास अच्छे नहीं हैं। और अगर पंजाब व जम्मू कश्मीर की बात करें तो ये 18वें और 19वें स्थान पर है जोकि अच्छा प्रदर्शन नहीं है।

आपको बता दें कि नीति आयोग ने 2016-17 के आंकड़ों के आधार पर इस इंडेक्स को तैयार किया है। इसमें स्कूली विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता बढ़ाने के प्रयासों के मूल्यांकन पर जोर दिया गया है।

इससे अलग उम्मीदवार ध्यान दें कि सूत्रों के अनुसार पता चला है कि जिन छोटे राज्यों की रैंकिंग अलग से की गयी है उनमें आठ राज्य-मणिपुर, त्रिपुरा, गोवा, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।