विजयदशमी के मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रेशमीबाग मैदान में ‘शस्त्र पूजा’ के बाद स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि लिंचिंग पश्चिमी तरीका है।

विजयदशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रेशमीबाग मैदान में ‘शस्त्र पूजा’ के बाद स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘भीड़ हत्या’ (लिंचिंग) पश्चिमी तरीका है। और देश को बदनाम करने के लिए भारत के संदर्भ में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ‘लिंचिंग’ शब्द लोकाचार से निकल कर नहीं आया है, ऐसे शब्द को भारतीयों पर ना थोपे।

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इसके साथ-साथ संघ प्रमुख ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह की भी तारीफ की और इसे एक साहसिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में भारत की सोच की दिशा में काफी परिवर्तन देखने को मिले है।  लेकिन केवल भारत मे नहीं बल्कि पूरी दुनिया मे कई ऐसी शक्तियां है जो अपने निहित स्वार्थों के लिये भारत को दृढ़ और शक्ति संपन्न नहीं होने देना चाहतीं है।

वहीं भागवत ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से देश में बहुत कुछ अच्छा चल रहा है। चंद्रयान-2 ने विश्व में भारत का मान बढ़ाया है।

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मोहन भागवत ने कहा कि इस सरकार में जनता ने अपना विश्वास दिखाया है। सरकार ने कई बड़े फैसले लेकर बताया कि उसे जनभावना की समझ है और वह देश का सही गलत जानती है। गुरु नानक देव की 550वीं जयंती, महात्मा गांधी की 150वीं जयंती, लोकसभा चुनाव जैसी कई घटनाएं हैं जिनकी वजह से यह साल कई सालों तक याद रहेगा।

मोहन भागवत ने देश की सुरक्षा के विषय मे कहा कि सौभाग्य से हमारे देश के सुरक्षा सामर्थ्य की स्थिति, हमारे सेना की तैयारी, हमारे शासन की सुरक्षा नीति और हमारे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुशलता की स्थिति इस प्रकार की बनी है कि इस मामले में हम लोग सजग और आश्वस्त हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारी स्थल सीमा और जल सीमाओं पर सुरक्षा सतर्कता पहले से अच्छी है जिससे उग्रवादी हिंसा में भी कमी आयी है।