जब जेठमलानी ने घोषणा की थी। कि वह अरविंद केजरीवाल के केस को मुफ्त में लड़ेंगे।

देश के पूर्व कानून मंत्री, प्रसिद्ध वकील और सांसद राज्यसभा राम जेठमलानी का रविवार को 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली में अपने आवास पर अंतिम सांस ली। देश में सबसे बड़े और सबसे महंगे वकील होने के नाते, राम जेठमलानी ने 2017 में सात दशकों तक वकालत के करियर को अलविदा कह  दिया था।

राम जेठमलानी का रविवार को 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

अतः आपको यह भी बता दें कि  भाजपा के सबसे प्रसिद्ध व दिग्गज नेता  अरुण जेटली और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मामला, जेठमलानी की ओर से लड़ा गया था। अपनी फीस के बारें , जब वरिष्ठ वकील ने एक बयान देते हुए कहां था कि अगर केजरीवाल या दिल्ली सरकार मुझे इस मामले में पैसा नहीं दे सकती है, तो मैं उन्हें गरीब मानूंगा और वह मुफ्त में इस केस को लड़ेंगे।

वास्तव में, तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने डीडीसीए मामले में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जब जेठमलानी ने घोषणा की कि वह केजरीवाल के मामले का मुफ्त में विरोध करेंगे। राम जेठमलानी ने कहा कि अगर दिल्ली सरकार या अरविंद केजरीवाल शुल्क नहीं दे पाए तो मैं इस मामले में मुफ्त में आऊंगा.  उन्होंने यह भी कहा कि वह अरविंद केजरीवाल को एक गरीब क्लाइंट के हिसाब से ट्रीट करेंगे.

आपको यह भी बता दें कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने डीडीसीए को लेकर अरविंद केजरीवाल पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। केजरीवाल के आरोपों के बाद, अरुण जेटली ने व्यक्तिगत रूप से उन पर हमला करने वालों से अपने बयान वापस लेने और माफी मांगने के लिए कहा था। ऐसा नहीं करने के लिए, अरुण जेटली ने इन लोगों के खिलाफ मानहानि के मुकदमे दायर करने की बात की गई थीं।

राम जेठमलानी का रविवार को 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

अरविंद केजरीवाल और पार्टी नेताओं द्वारा ऐसा करने में विफल रहने के लिए, जेटली ने केजरीवाल सहित छह पार्टी नेताओं के खिलाफ 10 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था, जहां केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी अदालत में पेश हुए थे ।

आपको बता दें कि राम जेठमलानी केजरीवाल के लिए 13 बार कोर्ट गए। इस तरह, तब उन्होंने दिल्ली सरकार से कुल 3 करोड़ 86 लाख के भुगतान की मांग की थीं। उसी समय, जेठमलानी की ओर से आए बिल के भुगतान और अनुमोदन के लिए उपराज्यपाल को एक पत्र भी भेजा गया था। इस पत्र पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी हस्ताक्षर किए थे। इसको लेकर राजनीतिक गलियरों में विवाद पैदा हो गया था. इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी केजरीवाल को आलोचना सहन करना पड़ी थी.